नई दिल्ली. गंदा पानी पीने से हर साल 6,000 बच्चों की मौत हो जाती है. अगर यही मौतें 20 जंबो जेट के क्रैश होने से होती तो सारे विश्व में तहलका मच गया होता. विश्व के नेताओं से लेकर बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों के मालिक सहित मीडिया हेडलाइन्स में यही खबर चल रही होती. चारो तरफ हल्ला मच गया होता. लेकिन इस तरह के कारणों से होने वाली इन 6000 मौतों को चुपचाप नजरअंदाज कर दिया जाता है.
 
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नवजात बच्चों और छोटे बच्चों की मौतें विकासशील देशों में अधिक बच्चे पैदा करने का एक बड़ा कारण है. बस ये कारण सामने नहीं आता. लेकिन इसमें सबसे हैरानी की बात ये है कि बच्चों में मलेरिया, एड्स और टीबी को मिलाकर होने वाली मौत से भी ज्यादा संख्या डायरिया से होने वाली मौतों का है. 
 
माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन से प्रभावित होकर एक्वाक्राफ्ट प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और iTV नेटवर्क ने ‘स्वच्छाग्रह’ नाम का अभियान शुरु किया है. बाल फिल्म सोसाइटी ऑफ इंडिया के सहयोग से यह जागरुकता अभियान 15 अगस्त 2016 को लॉन्च किया गया.
 
 
इस खास मौके पर iTV नेटवर्क के संस्थापक और प्रोमोटर कार्तिकेय शर्मा ने बताया, ‘बच्चे हमारे देश के भविष्य हैं. साफ पीने का पानी, स्वच्छता, पोषण, स्वास्थ्य और साफ-सफाई हर बच्चे का मौलिक अधिकार है. जाति, धर्म, भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर का आंकलन किए बगैर हर बच्चे को ये मौलिक सुविधाएं मुहैया होनी चाहिए. स्वच्छ भारत, भारत के स्कूलों में साफ पानी, सुरक्षित शौचालय, पर्याप्त पोषण और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. स्वच्छाग्रह अभियान के तहत् सहयोग, दान, पार्टनरशिप, स्वयंसेवकों, तरह तरह के इनोवेशन और तौर-तरीकों का इस्तेमाल करके साफ और स्वस्थ भारत के निर्माण को सुनिश्चित करना है. हम सोशल मीडिया का भरपूर फायदा उठाएंगे और इसके साथ ही स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत, संपन्न भारत अभियानों की जोर-शोर से वकालत करेंगे.’
 
कार्यक्रम के लॉन्चिंग के समय स्वच्छाग्रह कार्यक्रम के निर्माता ‘स्वच्छ श्री’ सुब्रमण्य कुसनुर ने कहा, ‘हमारे लिए स्वच्छ का मतलब बच्चों के लिए स्वच्छ पानी और साफ-सफाई है. वहीं आग्रह से हमारा मतलब है कि भारत के समुचित विकास के लिए समाज के हित में काम करने वाले लोगों को निमंत्रण देना है. इस अभियान से हमारा उद्देश्य अमीरों और गरीबों के बीच की खाई को पाटना है. स्वच्छाग्रह का मूलमंत्र है- बच्चों का, बच्चों के द्वारा, बच्चों के लिए. पूरे प्रोगाम को विभिन्न कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा. हर स्कूल में एक स्टूडेंट काउंसिल के गठन का प्रस्ताव किया गया है. ये काउंसिल कॉलेज के छात्रों द्वारा इस पूरे प्रोग्राम के संचालन में सहायता करेंगे. स्वच्छाग्रह प्रोग्राम के तहत शौचालयों की कमी और स्वच्छता, बालिकाओं को साफ-सफाई, कचरों और कूड़ों के खतरों के बारे में बताएगा. हमारा ये मानना है कि शिक्षा के बगैर किसी भी तरह का काम लंबे समय तक नहीं चल सकता है. ‘
 
चतुर आइडिया नाम की एक संस्था स्वच्छाग्रह के कार्यक्रमों को कार्यान्वित करती है. यह संस्था विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में स्टार्ट अप इंडिया प्रोग्राम को बढ़ावा देने का काम करती है. चतुर आइडिया एक युवा और गतिशील संस्था है. अभी तक चतुर आइडिया 450 कॉलेजों और 125 शहरों के विश्वविद्यालयों से जुड़ चुकी है. चतुर आइडिया के संस्थापक और सीईओ देवेश चावला ने कहा, ‘एक्वाक्राफ्ट और iTV नेटवर्क के साथ स्वच्छाग्रह कार्यक्रम में जुड़कर हम बहुत उत्साहित हैं, साथ ही 80 कॉलेजों और 4800 स्वयंसेवी स्वतंत्रता दिवस के दिन इस प्रोग्राम से जुड़ें. इससे यह साबित होता है कि भारत क्रांति के लिए तैयार है. जमीनी स्तर पर विकास के लिए सामुहिक सहयोग जरुरी है. हमें आशा और विश्वास है कि भारत के 125 शहरों से सभी 450 कॉलेज इस प्रोग्राम में हमारे साथ जुड़ेंगे. इससे हम ऐसे लोग खड़े करेंगे जो पूरे भारत और खासकर स्कूलों में पीने के पानी और स्वच्छता की जरुरतों को पूरा करेंगे और उनको बढ़ावा देंगे.’
 
एक्वाक्राफ्ट प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और सीईओ सुब्रमण्या ने कहा, ‘सभी स्कूलों, कंपनियों और स्वयंसेवकों की तरफ से सहयोग का मिलना बहुत ही उत्साहजनक है. स्वतंत्रता दिवस के दिन लार्सन और टूबरो पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वाधान में मोक्षदा अमूर और महक श्रीवास्तव के एक नुक्कड नाटक ‘स्वच्छ भारत सच होगा’ तालसारी में महाराष्ट्र के 8 स्कूलों के बच्चों के सहयोग से आयोजन हुआ. इसी तरह अंधेरी के एमवीएम एजुकेशनल ट्रस्ट के 2000 से ज्यादा छात्रों ने स्वच्छाग्रह कार्यक्रम का समर्थन करने की शपथ ली. ये बच्चे मुंबई के बाहर गांवों के स्कूलों में स्वच्छाग्रह प्रोग्राम का संचालन करेंगे. समाज में बदलाव लाने का यही मूल मंत्र है. बच्चों की अधिक से अधिक भागीदारी इस कार्यक्रम की सफलता को सुनिश्चित करेगी.’