नई दिल्ली. बीजेपी से नाता तोड़ चुके दक्षिणपंथी विचारक केएन गोविंदाचार्य ने गोहत्या के खिलाफ 7 नवंबर से शुरू हो रहे अपने आंदोलन को टालते हुए कहा है कि गाय के कारोबार में शामिल 80 फीसदी लोग हिंदू हैं, ऐसे में गौहत्या या बीफ के लिए मुसलमानों को टार्गेट करना गलत है.

एक अंग्रेजी अख़बार द हिन्दू से बातचीत में गोविंदाचार्य ने कहा कि गाय बूचड़खाने तक तभी पहुंचती है जब किसान उसे बेचता है. उन्होंने कहा कि गाय के कारोबार में मुसलमान तो सबसे आखिरी में थोड़े से लोग हैं क्योंकि इस कारोबार में 80 फीसदी लोग हिंदू हैं.

उन्होंने कहा कि देश में इस समय जो माहौल है उसके मद्देनजर उन्होंने 7 नवंबर से गोहत्या के खिलाफ शुरू होने वाले अपने आंदोलन को टाल दिया है. उन्होंने कहा कि ये समय आंदोलन के लिए ठीक वक्त नहीं है.

गौरक्षा धार्मिक नहीं, आर्थिक और कृषि व्यवस्था का मसला

गोविंदाचार्य ने कहा कि गौरक्षा धार्मिक मसला नहीं है लेकिन राजनीतिक दल इसे मुद्दा बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश में जिस तरह से खेती हो रही है उसमें गाय इस तरह के कारोबार का शिकार बन रही है.

उन्होंने कहा कि एक समाज के तौर पर हमें ये तय करना होगा कि हम पश्चिमी देशों की नकल करेंगे या ऐसी आर्थिक और कृषि व्यवस्था विकसित करेंगे जो प्रकृति के साथ-साथ हमारी मान्यताओं के लिहाज से भी ठीक हो.

गोविंदाचार्य ने कहा कि गौहत्या मुगलकाल में होती थी लेकिन बड़े पैमाने पर इसकी शुरुआत अंग्रेजों ने की जो 1857 की क्रांति के बाद इसके जरिए हिंदू और मुसलमानों को लड़ाना चाहते थे.