नई दिल्ली. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की जांच टीम की एक सदस्य फरीदा खान ने दादरी में बीफ की अफवाह के बाद उग्र भीड़ के हाथों अखलाक की मौत को सुनियोजित हत्या करार दिया है. फरीदा ने कहा कि जो सबूत मिले हैं उसके आधार पर यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि यह एक पूर्वनियोजित हत्या थी.
 
आयोग के अध्यक्ष नसीम अहमद की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच टीम दादरी के बिसहड़ा गांव गई थी. टीम में अहमद और फरीदा के अलावा सेरिंग नामग्याल शानू शामिल थे. टीम की बुधवार को बैठक होनी है जिसमें रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा.
 
हमले के वक्त सो रहा था अखलाक का पूरा परिवार
 
आयोग की फैक्ट फाइंडिंग टीम की सदस्य फरीदा ने कहा कि अखलाक की हत्या तात्कालिक नहीं थी बल्कि बाकायदा योजना बनाई गई थी. फरीदा ने कहा, ‘यह संभव नहीं है कि कहीं दूर से भीड़ आए और किसी पर हमला कर दे. पीडि़त का परिवार गहरी नींद में था जब हमले के लिए काफी लोग अचानक इकट्ठा हो गए. वे पांच मिनट के अंदर तो जमा नहीं हुए होंगे. कुछ तो योजना बनाई गई होगी. यह तात्कालिक घटना नहीं है.’ 
 
बिसहड़ा के हिन्दू भी चाहते हैं कि अखलाक के हत्यारों को सज़ा मिले
 
फरीदा ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि गांव में हिन्दू परिवार के कई लोग आगे आए और दोषियों की पहचान में मदद को तैयार दिखे. फरीदा ने कहा कि वो इस तरह के मामलों की जांच करती रही हैं लेकिन ज्यादातर मौके पर लोग पीछे हट जाते हैं. बिसहड़ा में हिन्दू भी चाहते हैं कि अखलाक के हत्यारों को सज़ा मिले.
 
एक समुदाय, दूसरे समुदाय की दया पर ज़िंदा नहीं रह सकता
 
फरीदा ने कहा कि मुसलमानों के नागरिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि एक समुदाय किसी दूसरे समुदाय की दया पर नहीं रह सकता. संविधान हर समुदाय को उसके धर्म और संस्कृति के मुताबिक जीने का अधिकार देता है. सरकार को हर समुदाय के इस अधिकार की रक्षा की गारंटी करनी चाहिए.