नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) ने लेखकों के साहित्य अकादमी लौटाने की घटना पर कहा कि यह ‘मोदी फोबिया’ पैदा करने के लिए किया गया है. आरएसएसएस ने साप्ताहिक पत्रिका ‘ऑर्गेनाइजर’ में लिखा कि भारत में अल्पसंख्यकों को लेकर जो लेखक सम्मान लौटा रहे हैं, वे सब ‘मोदी फोबिया’ पैदा करने और अपनी ‘संबद्ध जगहों को सुरक्षित रखने’ के लिए ऐसा कर रहे हैं.
 
पाकिस्तान पर भी साधा निशाना
आरएसएस ने ‘ऑर्गेनाइजर’ के जरिए अल्संख्यक मुद्दे पर पाकि‍स्तान की ओर से जताई गई चिंता पर कहा कि पाकिस्तान भारत में ‘मोदी फोबिया’ पैदा करने में मदद कर है.
 
इसके संपादकीय में कहा गया है, ‘हम देश भर में अलग-अलग विरोध देख रहे हैं जिसमें मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार की धार्मिक सहिष्णुता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर उसके पिछले रिकॉर्ड की आलोचना की जा रही है. मुंबई में बीजेपी की राजनीतिक सहयोगी शिवसेना ने पाकिस्तानी नेता कसूरी की किताब जारी होने के खिलाफ विरोध किया.
 
बता दें कि पाकिस्तान में पंजाब के विधायकों ने भारत में हाल ही में शिवसेना की पाकिस्तान विरोधी घटनाओं की कड़ी आलोचना करते हुए विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित करके इस दल को आतंकवादी घोषित करने की मांग की.
 
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के विधायक फैज मलिक ने शिवसेना के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया जिसे विधानसभा ने स्वीकार कर लिया. प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र से मांग की गई है कि वह शिवसेना को आतंकवादी संगठन घोषित करते हुए उस पर प्रतिबंध लगाए. 
 
नयनतारा सहगल ने की थी पुरस्कार लौटाने की शुरुआत
दादरी में मोहम्मद अखलाक की हत्या के बाद सबसे पहले साहित्यकार नयनतारा सहगल ने इस तरह की घटनाओं को रोकने में सरकार की नाकामी के खिलाफ साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाया था. नयनतारा सहगल देश के पहले पीएम जवाहरलाल नेहरू की भंगिनी हैं.
 
उनके बाद अशोक वाजपेयी, उदय प्रकाश, के. सच्चिदानंद, मंगलेश डबराल, राजेश जोशी, सारा जोसेफ समेत अब तक 24 साहित्यकारों ने साहित्य अकादमी को पुरस्कार लौटा दिया है. सांप्रदायिक माहौल की वजह से साहित्य अकादमी पुरस्कारों की वापसी के सिलसिले के बीच दिलीप कौर तिवाना पहली साहित्यकार हैं जिन्होंने अब पद्मश्री अवार्ड लौटा दिया है.