नई दिल्ली. पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री ने दावा किया है कि ताशकंद में पाकिस्तान के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर के बाद उनके पिता की हत्या की गई थी. उन्होंने मांग की है कि घटना की गहन जांच कराई जाए और सारी फाइलें सार्वजनिक की जाएं.

कांग्रेस नेता अनिल शास्त्री ने कहा, “मैं भारतीय प्रधानमंत्री से आग्रह करता हूं कि दस्तावेज जारी करें. उनकी मौत की जांच कराने का विचार भी बुरा नहीं है. सभी जिंदा बचे गवाहों से पूछताछ की जाए और सभी कयासों को स्पष्ट किया जाए.”

ताशकंद समझौते के बाद हुआ था निधन

शास्त्री और पाकिस्तान के तत्कालीन फील्ड मार्शल अयूब खान को तत्कालीन सोवियत प्रधानमंत्री अलेक्सी कोसिजिन ने 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद शांति वार्ता के लिए ताशकंद आमंत्रित किया था. 10 जनवरी, 1966 को समझौते पर हस्ताक्षर हुआ था, लेकिन उसके कुछ घंटे बाद शास्त्री को मृत पाया गया था. कहा गया कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था.

परिवार ने किया हत्या का दावा

लाल बहादुर शास्त्री के परिवार ने कहा कि उनके शरीर पर नीले और सफेद निशान किसी गड़बड़ी के संकेत थे. अनिल ने कहा, “जब उनका शव पालम हवाई अड्डे पर आया तोे हमने देखा कि उनका शव नीला पड़ गया था और उनके शरीर पर सफेद धब्बे थे.  मेरी मां ने भी मुझसे कहा था कि ये हत्या है और इसमें बड़ी गड़बड़ी है.”

अनिल ने भारतीय दूतावास पर लगाया आरोप

अनिल शास्त्री ने इसे अविश्वसनीय माना कि ताशकंद में भारतीय प्रधानमंत्री के कमरे में न कोई कॉल बेल थी, न टेलीफोन, न कोई केयरटेकर और न ही प्राथमिक उपचार की व्यवस्था. उन्हें खुद चलकर दरवाजे तक जाना पड़ा था.

उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय दूतावास ने लापरवाही की हद कर दी थी. शास्त्री ने कहा कि भारत सरकार ने उनकी मौत को गंभीरता से नहीं लिया जिसकी उन्हें बहुत पीड़ा है.

शास्त्री जी को थी घोटाले की जानकारी

अनिल शास्त्री ने कहा कि उनके पिता को एक घोटाले की जानकारी थी जिसमें पोत परिवहन कारोबार से जुड़ी हस्ती धरम तेजा शामिल था. प्रख्यात पत्रकार खुशवंत सिंह के एक लेख का जिक्र करते हुए शास्त्री ने कहा कि जिस समय उनके पिता की मौत हुई थी, तेजा उस सयम ताशकंद में मौजूद था. उन्होंने यह भी कहा कि भारत लौटने के बाद वो तेजा के खिलाफ कार्रवाई करने वाले थे और जांच का आदेश जारी करने वाले थे.

शास्त्री जी की मौत में विदेश का हाथ

पिता की मौत में विदेशी शक्ति का हाथ होने का संदेह जताते हुए अनिल ने कहा कि शास्त्री को उस समय अचानक ढेर सारी शक्ति मिल गई थी जब उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ पूरी ताकत से जवाबी कार्रवाई की. यह अमेरिका, चीन या कोई तीसरा देश था. मैं किसी देश का नाम नहीं ले सकता लेकिन सच यह है कि लाल बहादुर शास्त्री क्षेत्र में बहुत ताकतवर बनते जा रहे थे.

निजी चिकित्सक की दुर्घटना में मौत फिर पीए यादाश्त खो बैठा

उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ रहे उनके निजी चिकित्सक डॉ. आर.एन. चुग के अचानक निधन पर भी संदेह जताया. चुग की एक दुर्घटना में अपने परिवार के साथ मौत हो गई थी. अनिल ने कहा कि उनके पिता के निजी सहायक के साथ भी दुर्घटना घटी और वह अपनी यादाश्त खो बैठा था. उन्होंने अपने पिता की लापता हो गई निजी लाल डायरी को लेकर भी चिंता जाहिर की. IANS