नई दिल्ली: केरल में राजनीतिक हिंसा की लड़ाई अब दिल्ली में भी लड़ी जा रही है. केरल राजनीतिक हिंसा के खिलाफ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को दिल्ली में जन रक्षा यात्रा निकाली और संबोधित करते हुए कहा कि हिंसा की राजनीति करना वामपंथियों के स्वभाव में ही है. शाह की ये यात्रा कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क से सीपीएम दफ्तर तक निकाली गई जिसमें दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी भी शामिल हुए. बीजेपी की जनरक्षा यात्रा को देखते हुए दिल्ली में सीपीएम दफ्तर के बाहर बैरिकेडिंग लगा दी गई थी. इस मौके पर अमित शाह ने केरल की लेफ्ट सरकार पर निशाना साधा और कहा कि राजनीतिक हिंसा के आगे बीजेपी नहीं झुकेगी.
 
 
शाह ने कहा कि मैं सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से पूछता हूं कि वे अब कहां चले गए जब बीजेपी के 12 कार्यकर्ताओं की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई. अगर वो हिंसा के खिलाफ हैं तो हमारे कार्यक्रताओं के लिए कैंडल मार्च क्यों नहीं निकलाते. अगर वो किसी भी प्रकार की हत्या के खिलाफ हैं तो कोई कुछ क्यों नहीं बोलता. हिंसा की राजनीति करना वामपंथियों के स्वभाव में ही है. साथ ही उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि मेरी खुद इस रक्षा यात्रा पर नजर है, हमारे रोजाना 10 हजार कार्यकर्ता पैदल चलेंगे. मैं सभी से आग्रह करता हूं कि लेफ्ट की सरकार के जड़ से उखाड़ फेंकें. ये लोग केवल राजनीति करना जानते हैं, विकास का काम नहीं. ये लोग केवल दूसरों पर किचड़ उछालना जानते हैं और हम किए पर हमेशा चुप हो जाते हैं. 
 
 
बता दें कि अमित शाह अक्टूबर में तीन दिनों के केरल दौरे पर भी गए थे. इस दौरान उन्होंने कन्नूर के मशहूर राजराजेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की. अमित शाह ने न सिर्फ जनरक्षा यात्रा को हरी झंडी दिखाई, बल्कि खुद 9 किलोमीटर की पदयात्रा में शामिल भी हुए. असम और जम्मू-कश्मीर में पार्टी की सरकार के गठन के बाद केरल और पश्चिम बंगाल दो ऐसे राज्य हैं, जिसे बीजेपी राजनीतिक रूप से काफी अहम मानती है. पार्टी इन दोनों राज्यों में सत्ता हासिल करने के लिए भरपूर कोशिश भी कर रही है. 

 
बीजेपी ने 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में केरल की सभी 20 लोकसभा सीटों को रेखांकित कर जमीन तैयार करना अभी से शुरू कर दिया है. केंद्रीय मंत्रियों को इसकी जिम्मेदारी दी जा चुकी है. राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए ही केंद्र सरकार ने पिछले मंत्रिमंडल विस्तार में केरल से अल्फोंस कन्नथनम को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया था.