नई दिल्ली. 1993 में हुए मुंबई ब्लास्ट के आरोपी याकूब मेमन की फांसी लेकर विवाद जारी है. उन्हें गुरुवार के दिन नागपुर जेल में फांसी दे दी गई जिसके बाद याकूब की फांसी को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है. फांसी से पहले बुधवार के दिन जहां एमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस सजा पर नाखुशी जताई थी वहीं याकूब की फांसी के बाद अब कांग्रेसी नेता शशि थरुर, दिग्विजय सिंह समेत सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने भी प्रतिक्रिया दी है.

याकूब के खिलाफ नहीं थे सबूत: मार्कंडेय काटजू
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने भी याकूब मेमन को फांसी देने को पूरी तरह गलत बताया है. उन्होंने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में स्पष्ट कहा है कि याकूब के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं थे और उसे फांसी देना सरासर गलत है. काटजू ने यह भी कहा कि भारत में सांप्रदायिक अलगाव बढ़ता जा रहा है ऐसे फैसले उसी को कायम रखने के लिए किये जाते हैं.

कानून ने अपना काम किया, सियासत करने की जरूरत नहीं: शाहनवाज
फांसी के बाद बीजेपी की तरफ से पहली प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि देश की अदालत पर सबको भरोसा है और इस मामले में सियासत करने की जरूरत नहीं है. जो भी अपराध करेगा उसके खिलाफ कानून अपना काम करेगा. सजा से संदेश साफ है कि इस देश में बेगुनाह ना मरे और गुनहगार बचे नहीं. 

राज्य प्रायोजित हत्याओं से हम भी कातिल बन गए हैं: थरुर
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने याकूब मेमन की फांसी पर लिखा,’ राज्य प्रायोजित हत्याओं से हम कातिलों की लिस्ट में आ गए हैं. सरकार के एक व्यक्ति को फांसी पर चढ़ाने की खबर से मैं दुखी हूं.’ थरूर ने आगे लिखा, ‘मौत की सजा से न्याय व्यवस्था को किसी भी तरह का फायदा नहीं पहुंचता है. हम सभी को आतंकवाद के खिलाफ लड़ना चाहिए पर राज्य प्रायोजित हत्याएं भी आतंकवाद की श्रेणी में ही आती हैं.’

सुप्रीम कोर्ट पर सवाल नहीं उठा सकते: एमजे अकबर
बीजेपी नेता व राज्यसभा सदस्य ने कहा,’मुझे अफसोस है कि कुछ लोग ऐसी बातें करते हैं. हमारे देश में कानून है, सुप्रीम कोर्ट सबसे ऊपर है. आप सुप्रीम कोर्ट पर सवाल नहीं उठा सकते. मुझे नहीं लगता कि यह जल्दबाजी में लिया गया फैसला है. अगर 22 साल में फैसला होता है तो उसे आप जल्दी कैसे कह सकते हैं.’

सरकार और न्यायपालिका की साख दांव पर है: दिग्विजय सिंह
दिग्विजय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि याकूब की फांसी पर सरकार और न्यायपालिका ने कदम उठा कर मिसाल पेश की है. उम्मीद है कि सारे मामलों में जाति और धर्म से ऊपर उठ कर इसी तरह से फैसले होंगे. संदेह है कि बाकी केसों में इतनी तेजी से काम होगा. सरकार और न्यायपालिका की साख दांव पर है. 

जो याकूब मेमन को सपोर्ट कर रहे हैं, वे गलत हैं: आजम
आजम ने कहा, ‘जो लोग याकूब मेमन को सपोर्ट कर रहे हैं, वे गलत हैं और समाज को बांटना चाहते हैं. कुछ लोग ऐसे बयान दे रहे हैं, जिससे याकूब के मजहब को उछाला जा रहा है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. कानून सबसे ऊपर है.’

सरकार ने फांसी देने में जल्दबाजी की: मजीद मेमन
एनसीपी नेता मजीद मेमन ने कहा, ‘केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकार है. सरकार ने फांसी देने में जल्दबाजी की. मर्सी पिटीशन खारिज करने से पहले प्रेसिडेंट को ज्यादा समय नहीं मिला, सरकार ने दबाव डाला. सुप्रीम कोर्ट ने जल्दबाजी में फैसला किया. 21 साल जब रुके थे तो 21 दिन और रुकने में कयामत नहीं आ जाती.

गुजरात दंगों के दोषियों को सरकार फांसी क्यों नहीं देती​: ओवैसी  
ओवैसी ने कहा, ‘इंसाफ नहीं हुआ. ये ठीक है कि मुंबई दंगों में जो लोग मारे गए थे, उनके दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन बाबू बजरंगी और माया कोडनानी, कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा को भी फांसी मिलनी चाहिए. फांसी पर लटकाना अगर इंसाफ है तो इन लोगों को भी फांसी मिलनी चाहिए. मैं याकूब का पक्ष नहीं लेता, लेकिन हमेशा हमारा ही नुकसान होता है. बेअंत सिंह के कातिल को मजहब के नाम पर बचाया जा रहा है. यही हाल राजीव के हत्यारों का है. बाबरी मस्जिद गिराने वालों को भी फांसी हो. अगर मैं सम्मान के साथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाखुश होता हूं तो क्या गलत है?’ ओवैसी ने यह भी कहा, ‘याकूब ने तो इंडियन एजेंसीज की मदद की. उसने अपने भाई के खिलाफ भी सबूत दिए. गुजरात दंगों के दोषियों को सरकार फांसी क्यों नहीं देती?

याकूब की फांसी पर अफसोस है: अबू आजमी
सपा नेता अबू आजमी ने कहा, ‘याकूब की फांसी पर अफसोस है. याकूब खुद चल कर आया था, खुद सरेंडर किया था. रॉ अफसर बी रमण का ऑर्टिकल पढ़ने के बाद मुझे लगता है कि यह गलत हुआ. हमें सोचना होगा कि दाऊद और याकूब ने बम ब्लास्ट क्यों कराए? इसकी बात भी होनी चाहिए.’