नई दिल्ली. भारत के ‘मिसाइल मैन’ से मशहूर पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का सोमवार को निधन हो गया. इस दिन वह अपने सहयोगी और पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार सृजन पाल सिंह के साथ थे और आखिरी वक्त तक उनके साथ रहे. पढ़िए डॉ कलाम के आखिरी आठ घंटे का सफर सृजनपाल सिंह की कलम से…

”27 जुलाई की दिन की शुरुआत 12 बजे हुई. हमने साथ दिल्ली से गुवाहाटी के लिए फ्लाइट लिया. वह उस समय अपने गहरे रंगे की ‘कलाम सूट’ पहने हुए थे. फ्लाइट से उतरने के बाद हमने कार ली थी. ढाई घंटे बाद हम आईआईएम शिलांग पहुंचे. इस यात्रा में उनसे तीन मुद्दों पर बात हुई. सबसे पहले वे सोमवार को हुए पंजाब आतंकी हमले को लेकर दु:खी हुए. चूंकि शिलांग में लेक्चर का टॉपिक ‘Creating a Livable Planet Earth (पृथ्वी को रहने योग्य बनाना)’ था तो इसे जोड़ते हुए कलाम ने कहा, ‘अगर देखा जाए तो लोगों की बनाई शक्ति पृथ्वी में जीने के लिए प्रदूषण जितनी ही खतरनाक है.’ 

दूसरा उन्होंने संसद में लगातार हो रहे हंगामे पर बात की. वह संसद की सर्वोच्चता की हक में हमेशा से रहे. दिल्ली से शिलॉन्ग जाते समय रास्ते में वह संसद में हो रहे गतिरोध पर बात कर रहे थे. कलाम बेहद परेशान थे कि सरकारें बदलती रहती हैं लेकिन संसद में हर बार वही होता है. फिर उन्होंने कहा कि आज वह लेक्चर समाप्त होने के बाद आईआईएम के छात्रों से ही इस सवाल का जवाब मांगेंगे.’ पूर्व राष्ट्रपति ने अगली किताब ‘एडवांटेज इंडिया’ में भी इस मुद्दे को शामिल करने की योजना बनाई थी

गुवाहाटी से शिलॉन्ग जाते समय रास्ते में कलाम के काफिले में 6-7 गाड़ियां थी. कलाम और मैं की गाड़ी के ठीक आगे वाले खुली जिप्सी पर तीन जवान थे. जिप्सी पर दो जवान बैठे हुए थे और उनका तीसरा साथी जवान खड़ा था. कलाम ने मुझसे पूछा कि जवान खड़ा क्यों है, ऐसे तो वह थक जाएगा. यह सजा की तरह है. उसे बैठने के लिए कह दो.’

कलाम के कहने पर मैंने रेडियो से जवान को संदेश देने की कोशिश की लेकिन रेडियो काम नहीं कर रहा था. अगले डेढ़ घंटे के सफर में कलाम ने मुझे को तीन बार याद दिलाया कि जवान से बैठने के लिए कहो. इसके बाद डॉक्टर कलाम ने मुझे कहा कि वे जवान से मिलकर शुक्रिया अदा करना चाहता हूं.

आईआईएम शिलॉन्ग पहुंचने के बाद डॉक्टर कलाम ने जवान से हाथ मिलाया और उससे पूछा कि क्या तुम थक गए हो, कुछ खाना चाहोगे ? कलाम ने कहा कि मेरे कारण तुम्हें खड़ा रहना पड़ा मैं इसके लिए माफी चाहता हूं. कलाम के यह कहने के बाद युवा जवान आश्चर्य से भर गया. जवान ने कहा कि सर आपके लिए मैं तीन घंटे क्या छह घंटे भी खड़ा रह सकता हूं.

इसके अलावा डॉक्टर कलाम ने रास्ते में विनम्र होने की खूबसूरती पर चर्चा की. जब हम कॉन्फ्रेंस हॉल पहुंचे तो उन्होंने कहा, ‘बच्चों को कभी इंतजार नहीं करवाना चाहिए.’ आखिरी वक्त उन्होंने मुझसे पूछा- ऑल फिट? मैंने कहा- जी साहब. इसके बाद वह दो वाक्य ही बोले कि गिर पड़े. मैंने ही उन्हें बांहों में उठाया. उन्हें हॉस्पिटल ले आए पर बचा नहीं सके. डॉक्टर कलाम हमेशा कहते थे कि मैं टीचर के रूप में ही याद किया जाना चाहता हूं और पढ़ाते-पढ़ाते ही चले गए…”

सृजनपाल सिंह ने डॉ कलाम के साथ मिलकर ‘री-इग्नाइटेड : साइंटिफिक पाथवेज़ टू ए ब्राइटर फ्यूचर’ किताब लिखी है. इस किताब में युवाओं को रोबोटिक्स, एयरोनॉटिक्स, न्यूरोसाइंसेज, पैथोलॉजी, पेलेन्टोलॉजी और मैटीरियल साइंसेज जैसे क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए सलाह भी दी गई है.

 

What I will be remembered for.. my memory of the last day with the great Kalam sir… It has been eight hours since we…

Posted by Srijan Pal Singh on Monday, July 27, 2015