देहरादून. उत्तराखंड के पौड़ी जिले के गांव पंचूर में आज सन्नाटा नहीं है जो आम तौर पर पहाड़ में बसे गांवों में देखने को मिलता है. एक घर के बाहर 18 मार्च को रात 12 बजे तक हलचल रही. 
मिलने वालों का तांता लगा है. घर के सदस्य भावुक हैं. 60 साल उम्र के आसपास पहुंच गई सावित्री देवी कुछ बोल नहीं पा रही हैं और वन क्षेत्राधिकारी के पद से रिटायर हुए आनंद सिंह बिष्ट की भी आंखों में खुशी के आंसू हैं.
साथ ही रुंधे गले से अपने बेेटे अजय को नसीहत भी दे रहे हैं कि सबको साथ लेकर चलना होगा, मुंह बंद रखना होगा. हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के नए सीएम योगी आदित्यनाथ की.
जिस गांव में हमेशा सन्नाटा पसरा रहता है वहां आज मीडिया पहुंच रही है क्योंकि गांव एक बेटा जो संन्यासी बनकर सबको छोड़ कर जा चुका है वह अब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का मुखिया बनने जा रहा है. 
वो अपने जीवन की सबसे बड़ी सियासी पारी खेलने के लिए मैदान में उतर चुका है. देश ही नहीं विदेश यहां तक की पाकिस्तान में भी उसके चर्चे हो रहे हैं. 
पिता आनंद सिंह से जब पूछा गया तो वह अपने बेटे से क्या कहना चाहते हैं तो रुंधे गले से उनके वह इतना ही बोल पाए विकास..सबको साथ लेकर चलने की आदत… चुप रहकर काम करना .कुछ ज्यादा कड़वी बात बोल जाते हैं वो…
योगी आदित्यनाथ के छोटे भाई को कुछ ज्यादा कुछ याद नहीं है. उनका कहना है कि उनको याद नहीं महाराज जी (गांव में अब उनको महाराज जी ही कहा जाता है) कब घर छोड़कर गए थे.
योगी के बड़े भाई की भी आंखों में आंसू हैं. वह कहते हैं कई बार गोरखपुर गए हैं उनसे मिलने. पांच बार सांसद रह चुके योगी आदित्यनाथ का परिवार बहुत ही साधारण है.
पिता जी सरकारी नौकरी से रिटायर हुए हैं उन्हीं की पेंशन से घर चलता है. योगी ने सभी भाइयों और गांव के सभी लोगों को सलाह देते हैं कि कोई गांव छोड़कर न जाए नहीं तो सबकुछ वीरान हो जाएगा.
योगी खास मौके पर ही गांव जाते हैं. मां से मिलते हैं लेकिन एक संन्यासी की तरह ही. देखने वाली बात यह है कि गांव में काफी दिनों बाद आई अचानक रौनक कितने दिन तक रहती है.