लखनऊ. यूपी विधानसभा चुनाव अपने चरम पर है. तीसरे चरण के चुनाव के लिए मतदान 19 फरवरी को होगा. सभी पार्टियों के दिग्गजों ने अपनी ताकत झोंक रखी है. लेकिन इससे पहले के चुनावों में जिन नेताओं को सुनने के लिए लोग-लोग दूर से आते रहे हैं वह इस बार पूरी तरह से गायब दिख रहे हैं.
1- कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी
सपा-कांग्रेस गठबंधन के बाद जिन राहुल और अखिलेश साथ-साथ चुनाव प्रचार कर रहे हैं. कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश हर लिहाज से अहम है.
यूपी की सत्ता से कांग्रेस 27 सालों से बाहर है. वहीं उनका संसदीय क्षेत्र रायबरेली भी इसी प्रदेश में हैं लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी चुनाव प्रचार से एकदम गायब हैं.
चुनाव की घोषणा होने करीब 6 महीने उन्होंने पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक रोड शो किया था लेकिन उसके बाद से वह दिखाई नहीं दीं.
बताया जा रहा है कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है और डॉक्टरों ने उनको धूल भरे वातावरण से दूर रहने की सलाह दी है.  हालांकि खबर है कि सोनिय गांधी ने रायबरेली और अमेठी के कुछ प्रत्याशियों से बात की है और उन्हें गठबंधन के हिसाब से चलने की सलाह दी है.
2- लालकृष्ण आडवाणी
बीजेपी के सबसे वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की रैलियों के बिना उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव अधूरा लग रहा है.
राम मंदिर आंदोलन के समय कभी यूपी में काफी लोकप्रिय हो चुके आडवाणी के लिए यह पहला चुनाव होगा जिसमें वह सक्रिय नही हैं. लोकसभा चुनाव 2014 के बाद आडवाणी शायद ही किसी चुनावी गतिविधि में हिस्सा लिया हो. 
3- पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह
राम मंदिर आंदोलन के समय सबसे बड़े नायक रहे बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी चुनाव प्रचार से दूर हैं. लोधी वोटबैंक में कभी एकछत्र अधिकार रखने वाले कल्याण सिंह अब राजस्थान के राज्यपाल हैं इस लिहाज से उनको संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करते हुए पार्टी की गतिविधियों से दूर ही रहना है.
4- पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव
कभी समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों के लिए जीत गारंटी बन जाने वाले मुलायम सिंह यादव इस बार चुनाव प्रचार कम ही कर रहे हैं. वह जहां भी जाते हैं उनके दिल से परिवार में मचे घमासान का दर्द बाहर आ ही जाता है.
कभी तो वह अखिलेश को बेटा बताते हुए उनके पक्ष में बयान देते हैं तो कभी उनको भाई शिवपाल की याद आ जाती है. उनकी रैलियों में आने वाले लोग भी कंन्फ्यूज हो जाते हैं कि आखिर वह कहना क्या चाहते हैं.
5- अमर सिंह 
समाजवादी पार्टी में कभी मुलायम सिंह यादव के बाद दूसरे नंबर पर रहे राज्यसभा सांसद अमर सिंह को उन्हीं के पार्टी के लोगों ने किनारा कर लिया है.
कभी सपा के लिए मुख्य रणनीतिकार रहे अमर सिंह अब पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को फूटी आंख नहीं सुहाते हैं. गाजियाबाद में वोट डालने के बाद उन्होंने इशारों-इशारों में इस दर्द को भी मीडिया से साझा किया था.
वह 2012 में सपा से बाहर होने के बाद अपनी पार्टी के राष्ट्रीय लोकमंच से भी प्रत्याशी उतार चुके हैं, लेकिन एक भी सीट भी नहीं जीत पाए थे. सपा में वापसी के बाद वह दोबारा पार्टी में वैसा रुतबा हासिल नहीं कर पाए हैं.
6- बीजेपी सांसद वरुण गांधी
सुल्तानपुर से बीजेपी सांसद और फायर ब्रांड नेता वरुण गांधी खुद को यूपी में सीएम प्रत्याशी के तौर पर प्रोजेक्ट कर चुके हैं, लेकिन पार्टी में उनका यह दावा खारिज कर दिया गया.  स्टार प्रचारकों की दूसरी लिस्ट में उनका नाम शामिल जरूर किया गया है लेकिन वह पहले की तरह सक्रिय नही हैं. 
7- लालजी टंडन
अटल बिहारी वाजपेयी के सबसे निकट सहयोगी और लखनऊ से सांसद रह चुके लाल जी टंडन भी इस बार चुनाव प्रचार में दिखाई नहीं दे रहे हैं.
उनके बेटे गोपाल टंडन लखनऊ पूर्व से चुनाव मैदान में हैं. चौक एरिया में बनी उनकी बनी कोठी ठंडाई और राजनीति के लिए मशहूर थी लेकिन अब वहां सन्नाटा छाया है. 
8- निर्मल खत्री
यूपी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष निर्मल खत्री भी इस बार पार्टी से साइडलाइन हैं. अभी तक के चुनाव प्रचार में वह कहीं नजर नही आए हैं.