नई दिल्ली. शिमला में बन रहे प्रियंका गांधी के घर पर भी विवाद शुरू हो गया है. हिमाचल प्रदेश के सूचना आयोग ने राज्य सरकार को दस दिन के भीतर आरटीआई आवेदनकर्ता को घर से जुड़ी जानकारियां देने का आदेश दिया है. और ये भी पूछा कि इतने दिन जानकारी ना देने के लिए क्यों ना जुर्माना भी लगाया जाए.

आरटीआई कार्यकर्ता देवाशीष ने मांगी है जानकारी
पिछले कई सालों से बार-बार प्रियंका गांधी के शिमला में बन रहे इस आशियाने की चर्चा होती रही. किस्से सुने गए सवाल पूछे गए लेकिन घर का सच कभी सामने नहीं आया. लेकिन इस बार चर्चा घर का सच सामने लाने के लिए ही हो रही है. दरअसल आरटीआई कार्यकर्ता देवाशीष भट्टाचार्य ने राज्य सरकार से घर के बारे में जानकारी मांगी थी जिसे देने से सरकार ने इंकार कर दिया. लेकिन राज्य सूचना आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए हिमाचल सरकार को आदेश दिया है कि 10 दिन के भीतर आरटीआई में पूछे गए सवालों का जवाब दिया जाए.

हिमाचल के बाहरी व्यक्ति को आखिर कैसे मिली इजाज़त
प्रियंका गांधी का घर शिमला के पास मशोबरा के गांव में बन रहा है. आरटीआई में हिमाचल सरकार से पूछा गया था कि किन नियमों के तहत प्रियंका गांधी को घर बनाने के लिए इजाजत दी गई है. दरअसल हिमाचल प्रदेश में कानून है कि हिमाचल का नागरिक बाहरी व्यक्ति को घर बनाने के लिए जमीन नहीं बेच सकता. ये सवाल पहले भी उठ चुके हैं लेकिन प्रियंका गांधी ने सुरक्षा कारणों को हवाला देते हुए घर की जानकारी को सार्वजनिक ना करने की मांग कर रखी थी. प्रियंका को एसपीजी सुरक्षा मिली हुई है.
 
सूचना आयोग ने सरकार से पूछा है कि क्यों न उस पर प्रियंका गांधी के घर से जुड़ी जानकारियां छिपाने के लिए हर रोज 250 रुपये के हिसाब से 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाए. घर के लिए जमीन यूपीए सरकार के कार्यकाल में 2007 में प्रियंका को मिली थी.