लखनऊ. उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सभी पार्टियों के बीच एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोपों का दौर शुरु हो गया है. इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी ने सत्ताधारी पार्टी पर निशाना साधा है. बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने विधानसभा चुनावों के बाद सरकार बनाने के लिए बीजेपी से हाथ मिलाने के सपा के आरोपों को खारिज करते हुए शुक्रवार कहा कि राज्य की सत्ताधारी सपा भगवा पार्टी की मदद के लिए मुसलमानों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है.
 
उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री व बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते शुक्रवार को कहा कि एसपी की जब-जब सरकार आई है, तब-तब बीजेपी और मजबूत हुई है. 
 
इस दौरान नसीमुद्दीन ने कहा कि बीएसपी ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार जरूर चलाई है, लेकिन पार्टी के उसूलों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि बीएसपी ने बीजेपी और आरएसएस के एजेंडे को अपने सरकार में लागू नहीं होने दिया. उसका असर यह था कि काशी अयोध्या और मथुरा में कोई नई परंपरा की शुरुआत नहीं हो पाई. 
 
सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि भाजपा और सपा एक दूसरे का हित साध रहे हैं. बसपा सरकार के समय भाजपा कमजोर हुई है. लेकिन जब जब सपा की सरकार बनी है तब तब भाजपा मजबूत हुई है. सिददीकी ने कहा कि सपा का जन्म जनसंघ और भाजपा की मदद से हुआ है. इतिहास गवाह है कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव 1967 में जब पहली बार जसवंत नगर से विधायक बने तो जनसंघ की मदद से बने.
 
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने आरोप लगाया समाजवादी पार्टी के नेता बीजेपी से मिले हुए हैं और उसका सबूत यह है कि जब भी मुलायम सिंह के घर में कोई मांगलिक कार्यक्रम होते हैं तो नरेंद्र मोदी से लेकर तमाम भाजपाई नेता उनके घर पर दिखाई पड़ते हैं. बीएसपी ने सवाल उठाया की 2012 के घोषणा पत्र में समाजवादी पार्टी ने वायदा किया था कि जेल में बंद बेकसूर मुसलमानों को रिहा किया जाएगा लेकिन यह वायदा भी झूठा निकला.