मुंबई. महाराष्ट्र में मराठा समाज का मूक क्रांति आंदोलन और तेज हो गया है. पिछले दिनों लगभग एक लाख लोग परभनी की एक रैली में शामिल हुए और मूक मार्च किया. हरियाणा में जाट आंदोलन, राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन, गुजरात में पाटीदार आंदोलन के बाद अब महाराष्ट्र में मराठा समाज ने सरकार को अपनी ताकत दिखाने के लिए ‘मूक क्रांति आंदोलन’ की शुरुआत की हैं. 
 
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सवर्ण मराठों ने सरकार से शिक्षा और नौकरी में आरक्षण की मांग की हैं, और अनुसूचित जाति/जनजाति कानून को ख़त्म करने को कहा हैं. दरअसल ये पूरा आंदोलन 13 जुलाई को हुई एक घटना के बाद से शुरू हुआ जिसमें कथित रूप से अहमदनगर के गांव कोपर्डी में एक नाबालिग लड़की के साथ तीन दलित युवकों ने सामूहिक बलात्कार किया था.
 
महाराष्ट्र में मराठों की आबादी लगभग 33 प्रतिशत है. मराठों का ये मूक आंदोलन अब तक परभनी, औरंगाबाद, बीड, उस्मानाबाद, जलगांव और नवी मुम्बई में हो चुका हैं. गौरतलब है कि इस आंदोलन को राजनीतिक पार्टियों का समर्थन भी प्राप्त हो रहा हैं. बीते शुक्रवार को अहमदनगर में हुए आंदोलन में कांग्रेस के नेता व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राधाकृष्ण विखेपाटील भी शामिल हुए.
 
वही दूसरी तरफ सरकार के कुछ नेता भी इस आंदोलन में शामिल हो चुके हैं. इस आंदोलन की अगली रैलियां 25 सितंबर को पुणे और वाशिम, 26 सितंबर को बुलडाणा और नंदुरबार, 27 सितंबर को सांगली, 28 सितंबर को धुले, 29 सितंबर को बारामती और 3 अक्टूबर को बारामती में होंगी.