अयोध्या : ‘देवरिया से दिल्ली’ की यात्रा पर निकले राहुल गांधी ने अयोध्या पहुंचे और वहां पर हनुमान गढ़ी के दर्शन किए. लेकिन उन्होंने रामलला के दर्शन नहीं किया. वह विवादित ढांचे से करीब एक किमी दूर रहे.
 
इनख़बर से जुड़ें | एंड्रॉएड ऐप्प | फेसबुक | ट्विटर
बता दें कि 1992 में हुई बाबरी विध्वंस की घटना के बाद से यह पहला मौका जब गांधी परिवार का कोई सदस्य अयोध्या पहुंचा हो. 1990 में उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी अयोध्या गए थे. उन्होंने उस समय सद्भावना यात्रा निकाली थी.
अयोध्या पहुंचे राहुल गांधी के तय प्रोग्राम के मुताबिक हनुमान गढ़ी के दर्शन और महंत ज्ञानदास से मिलने के अलावा कोई कार्यक्रम या मीटिंग नहीं है. 
 
रामलला और विवादित ढांचे से दूरी की हो सकती हैं यह बड़ी वजहें
दरअसल मंदिर आंदोलन का उभार ही एक ऐसा मुद्दा था जिसकी वजह से कांग्रेस उत्तर प्रदेश में पूरी तरह से खत्म हो गई. कांग्रेस के नेता इस पूरे आंदोलन की नब्ज ठीक से नहीं पकड़ पाए जिसका परिणाम यह हुआ कि बीजेपी, समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में बड़े वोट बैंक पर कब्जा जमा लिया.
 
अब यह पूरा मामला हाईकोर्ट से निकलकर सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है. आंदोलन के इतने साल बीत जाने के बाद भी कांग्रेस को आज तक यह इस मामले में कोई साफ रुख अपनाने में नाकाम रही है. 
 
यही वजह है कि राहुल गांधी ने अपनी अयोध्या के दौरान रामलला और विवादित स्थल से पूरी तरह दूरी बनाए रखी. इस मामले में कांग्रेस के नेता सफाई दे रहे हैं कि कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल की यात्रा किसानों के लिए इसका मंदिर या विवादित ढांचे से कोई संबंध नहीं है.
 
दरअसर कांग्रेस नहीं चाहती है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव ठीक पहले मंदिर-मस्जिद जैसे संवेदनशील मुद्दे में फंसा जाए. वहीं पार्टी को अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि की भी चिंता है ताकि समाजवादी पार्टी के शासन से नाराज मुस्लिम वोटों को चुनाव में खींचा जा सके.
 
क्या कहा महंत रामदास ने
राम जन्मभूमि की ओर से मुकदमा लड़ रहे निर्मोही अखाड़ा के संत महंत रामदास से भी राहुल गांधी मिले. महंत ने कहा ‘हम मंदिर में सबका स्वागत करते हैं. हम संत हैं. हम सबको आशीर्वाद देते हैं.