पटना. बिहार में टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेजों में एडमिशन सीजन खत्म होने के बाद भी खाली रह गई रिजर्व सीटों को भरने के लिए राज्य के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने आरक्षण नियमों में बदलाव करते हुए सवर्ण कैंडिडेट्स को दाखिला देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. रिजर्व सीटों को सवर्णों के लिए खोलने का दलित संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है.

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मुजफ्फरपुर, किशनगंज और सारण स्थित कुल पांच टीचर ट्रेनिंग कॉलेजों में 950 सीटें हैं जहां दाखिला सीजन खत्म होने के बाद 46 सीटें खाली रह गईं जो रिजर्व कैटेगरी के छात्र-छात्राओं के लिए है. संस्थानों ने खाली सीट भरने के लिए राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगा था.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और नीतीश सरकार में शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने इस मसले पर विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है जिसके तहत खाली रिजर्व सीटों पर जेनरल कैटेगरी के कैंडिडेट्स को दाखिला दे दिया जाएगा. मंत्री ने आगे से सभी कैटेगरी की मेधा सूची एक साथ तैयार करने को कहा है ताकि आगे चलकर खाली सीटों को भरने में दिक्कत न आए.

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सरकार के इस फैसले का सोशल मीडिया पर दलित समुदाय के लोग काफी विरोध कर रहे हैं. विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि खुद दलित समुदाय से आने वाले शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी के इस फैसले से गलत परंपरा की शुरुआत होगी और बैकलॉग सीटों को भरने के बदले आगे से संस्थान रिजर्व कैटेगरी की खाली सीटों पर इसी तरह से जेनरल कैंडिडेट्स को एडमिशन देने लगेंगे.