नई दिल्ली. मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की नेता वृंदा करात ने मोदी सरकार द्वारा डिफेंस और बीमा सहित कई क्षेत्रों में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति देने के फैसले की निंदा करते हुए कहा कि यह कही से भी राष्ट्रवाद नहीं है. 
 
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उन्होंने कहा कि एफडीआई की अनुमति देने से सिर्फ बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाभ होगा और घरेलू उद्योग व श्रमिक बर्बाद हो जाएंगे. उन्होंने कहा, “यह राष्ट्रवाद नहीं है, यह बहुराष्ट्रीय कंपनीवाद है. करात ने कहा, “जब बीजेपी विपक्ष में थी, तो उसने 100 फीसदी एफडीआई का विरोध किया था, अब वह खुद इसकी अनुमति दे रही है. हम इसकी निंदा करते हैं, क्योंकि यह जनविरोधी कदम है.”
 
इससे पहले भाकपा एक और दिग्गज नेता अमरजीत कौर ने आरोप लगाया कि बीजेपी की केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को नष्ट करने पर तुली हुई है. कौर ने कहा, “वे सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को खत्म करना चाहते हैं और उनकी जगह निजी कंपनियों को लाना चाहते हैं. 
 
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कौर ने कहा कि 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति से भारत में सूक्ष्म और मझौले स्तर के उद्यम खत्म हो जाएंगे और लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे. उन्होंने कहा, “डेयरी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में एफडीआई की अनुमति की क्या जरूरत है? क्या वे यह चाहते हैं कि ग्रामीण इलाकों में डेयरी और पशुपालन से अपनी आजीविका कमा रहे लोग बेरोजगार हो जाएं?