लखनऊ. राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के नामांकन के आखिरी दिन भाजपा ने बड़ा उलटफेर करते हुए विधान परिषद के लिए दूसरा कैंडिडेट देकर और राज्यसभा के लिए ऑफिसियल कैंडिडेट के अलावा एक निर्दलीय को समर्थन देकर राज्य में चुनाव फंसा दिया है. 
 
राज्यसभा की 11 और विधान परिषद की 13 सीटों के लिए उत्तर प्रदेश में चुनाव हो रहा है जिसमें अब राज्यसभा के लिए 12 प्रत्याशी और विधान परिषद के लिए 14 प्रत्याशी मैदान में उतर गए हैं. अगर कोई नामांकन वापस नहीं लेता है तो निश्चित है कि चुनाव होंगे और फिर विधायकों की खरीद-फरोख्त भी होगी.
 
समाजवादी पार्टी के खाते में 6 राज्यसभा और 8 विधान परिषद सीटें जाती हैं. बसपा के खाते में 2 राज्यसभा और 3 विधान परिषद सीटें आती हैं. कांग्रेस के खाते में एक विधान परिषद और निर्दलीय के समर्थन के साथ एक राज्यसभा बनता है. 
 
भाजपा के पास वोट कम हैं लेकिन उसने कैंडिडेट ज्यादा उतार दिए हैं
 
भाजपा एक प्रत्याशी विधान परिषद में और एक प्रत्याशी राज्यसभा भेज सकती है लेकिन भाजपा ने विधान परिषद के लिए दो प्रत्याशी उतार दिए हैं. प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष केशव मौर्य ने कहा है कि पार्टी दोनों उम्मीदवारों को बेहतर ढंग से चुनाव लड़ाएगी. उन्होंने अतिरिक्त मतों की जरूरत तो मानी लेकिन दावा किया कि विधायकों की खरीद-फरोस्त नहीं की जाएगी.
 
 
समाजवादी पार्टी ने 7 कैंडिडेट उतारे हैं जिसे जिताने के लिए सपा को 6 लोगों को जिताने के बाद बचे अपने वोट के अलावा 9 और वोट चाहिए. माना जा रहा है कि अजित सिंह की पार्टी उन्हें अपने 8 वोट ट्रांसफर कर देगी.
 
भाजपा के पास 41 वोट हैं जबकि विधान परिषद चुनाव जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 29 मत चाहिए. बीजेपी इस हिसाब से सिर्फ एक उम्मीदवार को जिता सकती है और तब उसके पास 12 वोट बचेंगे. इस 12 वोट के बाद भी दूसरे को विधान परिषद पहुंचाने के लिए उसे 17 और वोट चाहिए. 
 
क्रॉस वोटिंग, जोड़-तोड़ और मोल-भाव का बन रहा है माहौल
 
बीजेपी ने विधान परिषद के लिए भूपेंद्र चौधरी को पहला और दयाशंकर चौधरी को दूसरा उम्मीदवार घोषित किया है. राज्यसभा के लिए बीजेपी ने शिव प्रताप शुक्ला को ऑफिसियल कैंडिडेट बनाया है लेकिन प्रीति महापात्रा को निर्दलीय उतार दिया है. यूपी से राज्यसभा जाने के लिए प्रथम वरीयता के 34 वोट चाहिए. बीजेपी के पास शिव प्रताप शुक्ला के बाद 7 वोट बचेंगे इसलिए प्रीति जीतें इसके लिए उसे 27 और वोट का इंतजाम करना होगा.
 
बीजेपी विधान परिषद में अपना दूसरा उम्मीदवार या राज्यसभा में निर्दलीय प्रीति महापात्रा को तभी पहुंचा सकती है जब बाकी दलों के विधायक क्रॉस वोटिंग करें. इसलिए ये साफ है कि इस बार यूपी के राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव में जोड़-तोड़, मोल-भाव सब चलेगा.
 
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव में वोटिंग की नौबत ला देने का ठीकरा बीजेपी के माथे पर फोड़ते हुए कहा है कि इससे बीजेपी बेनकाब हो गई है जो बात तो ईमानदारी की करती है लेकिन 41 विधायकों के दम पर दो-दो प्रत्याशी को चुनाव में उतार देती है.