लखनऊ. मुंबई के अपने एनजीओ के जरिए गुजरात में गरीब लोगों के लिए शौचालय बनाने में जुटीं प्रीति महापात्रा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में कोहराम मचा दिया है. राज्यसभा चुनाव के लिए प्रीति के बतौर निर्दलीय पर्चा भर देने से अब यूपी की खाली हो रही 11 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना तय दिख रहा है.
 
प्रीति के मैदान में उतरने से पहले तक सपा ने 7, बसपा ने 2 और कांग्रेस और भाजपा ने 1-1 कुल 11 उम्मीदवार उतार दिए थे. ये सारे निर्विरोध जीतने की उम्मीद लगाए बैठे थे कि प्रीति ने पर्चा भर दिया. प्रीति के नामांकन में बीजेपी के कई विधायकों की मौजूदगी और उनका प्रस्तावक बनने से ये तो साफ हो गया है कि उन्हें यूपी में उतारने के पीछे बीजेपी आलाकमान है.
 
 
गुजरात में अपनी पहुंच के लिए मशहूर प्रीति नरेंद्र मोदी विचार मंच की अध्यक्ष हैं और बीजेपी के बड़े नेताओं से उनके बेहतर संपर्क हैं. प्रीति के पति अरबपति व्यापारी हैं. यूपी से राज्यसभा पहुंचने के लिए किसी भी उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के 34 वोट चाहिए. बीजेपी के पास राज्य में 41 विधायक हैं इसलिए वो सिर्फ एक कैंडिडेट को सुरक्षित रूप से राज्यसभा भेज सकती है.
 
प्रीति महापात्रा को समर्थन देने वाले 27 विधायक किनके होंगे ?
 
प्रीति को बीजेपी के बचे हुए 7 वोट मिलने के बाद भी जीतने के 27 और वोट चाहिए. नामांकन के बाद प्रीति ने जिस आत्मविश्वास से बात की उससे लगता है कि वो पर्याप्त फील्डिंग करके आई हैं. माहौल ऐसा बन रहा है कि क्रॉस वोटिंग और खरीद-फरोख्त का खतरा बढ़ गया है.
 
जुलाई में यूपी से राज्यसभा की 11 सीटें खाली हो रही हैं. संख्या बल के हिसाब से समाजवादी पार्टी का 6, बसपा का 2, निर्दलीय के समर्थन से कांग्रेस का 1 और भाजपा का 1 प्रत्याशी राज्यसभा आसानी से जा सकता है. सपा को अपने 7वें कैंडिडेट के लिए 9 वोट की जरूरत पड़ेगी जो शायद अजित सिंह के आरएलडी से पूरा हो सकता है.
 
बीजेपी के समर्थन में यूपी में उतरीं प्रीति महापात्रा को जिन 27 एक्स्ट्रा वोटों का जुगाड़ करना होगा उसमें कुछ तो उनके नामांकन में दिखे. जैसे समाजवादी पार्टी के बागी विधायक रामपाल यादव. उनके रडार पर बागी, विक्षुब्ध और छोटे दलों के विधायक हैं. वैसे उनके नामांकन में प्रस्तावक बनने आए पीस पार्टी के अयूब खान बीजेपी के विधायकों को देखने के बाद अपना प्रस्ताव वापस लेकर चले गए.