देहरादून. कांग्रेस के 9 बागियों के बीजेपी में शामिल होने बाद जहा एक ओर बागियों के चेहरे खिले हुए हैं तो वहीं पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के अन्दर नाराजगी उठाने लगी है. यही नहीं जिन सीटों पर ये बागी कांग्रेस के विधायक थे अब उन सीटों पर बीजेपी के विधानसभा के टिकट के दावेदारो को चिंता सताने लग गई है.
 
हालांकि बीजेपी ने इस स्थिति से निपटने के लिए बागियों के विधानसभा क्षेत्रों में बैठक शुरू कर दी है और संभावित नुकसान होने से पहले डेमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है.
 
रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी में विरोध का उठना इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि बागियों की एंट्री में हाईकमान का सीधा दखल रहा है, इसलिये वे खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं, लेकिन बातों में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंता साफ-साफ दिखाई दे रही है. 
 
नरेन्द्र नगर सीट से पिछला चुनाव हारे ओम गोपाल रावत कहते हैं, पांच साल वह चुनाव लड़ने की तैयारी इस उम्मीद से कर रहे हैं कि पार्टी उन्हें उम्मीदवार बनाएगी. 2012 के चुनाव में बीजेपी ने ओम गोपाल को प्रत्याशी बनाया था. चुनाव के दौरान ओमगोपाल यूकेडी छोड़कर बीजेपी में आए थे. उन्हें तब कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े सुबोध उनियाल ने बेहद करीबी अंतर से पराजित किया था.
 
अब उनियाल बीजेपी में शामिल हो गए हैं और उनकी पार्टी में एंट्री के साथ ही चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि उन्हें बीजेपी नरेन्द्र नगर से उम्मीदवार बनाएगी. ओम गोपाल की चिंता का यही सबसे बड़ा कारण है. लेकिन केंद्रीय नेतृत्व के सामने वह मजबूर हैं.
 
नेताओं ने इशारे में दिखाई नाराजगी
सूत्रों की मानें तो बागियों की एंट्री के बाद से ये सभी दावेदार सक्रिय हो गए हैं और प्रदेश अध्यक अजय भट्ट से अपने राजनीतिक भविष्य की गारंटी चाह रहे हैं. इस मसले पर भट्ट कहते हैं, बागियों की एंट्री से पार्टी में कोई नाराजगी नहीं है. ये राष्ट्रीय स्तर का निर्णय है. जहां तक टिकट की गारंटी का सवाल है तो ऐसा कोई समझौता नीं हुआ है.
 
पार्टी में टिकट की गारंटी न तो उनके लिये है जो चार-पांच साल से तैयारी कर रहे हैं न ही उनके लिये जो पार्टी में शामिल हुए हैं. जहां तक नाराजगी का सवाल है तो मनुष्य का स्वभाव है नाराज होना. पार्टी लाइन या नीतियों का विरोध होगा तब देखा जाएगा.