नई दिल्ली. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अगस्ता वेस्टलैंड रिश्वतखोरी के मुद्दे पर सदन में चली बहस के बाद रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर द्वारा दिया गया जवाब निराशाजनक रहा. आजाद ने कहा कि मंत्री ने जिस तरीके से आरोप लगाए, उससे मैं निराश हूं. उन्होंने कहा कि पूरा सदन अपमानित हुआ, क्योंकि मंत्री ने मुद्दे पर सदस्यों द्वारा कही गई बातों को सुने या उनपर विचार किए बगैर लिखित जवाब दिया.
 
 
सदन में इस मुद्दे पर चार घंटे से अधिक समय तक चली बहस पर मंत्री द्वारा दिए गए जवाब पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जनता दल (युनाइटेड) के शरद यादव और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने कहा कि मामले की जांच सावधानीपूर्वक की जानी चाहिए और राजनीतिक लाभ लेने के लिए अनावश्यक आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए.
 
राज्यसभा में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि अगस्ता वेस्टलैंड में कोई शक नहीं है कि भ्रष्टाचार हुआ नहीं हुआ, पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने भी माना था कि भ्रष्टाचार हुआ है. पर्रिकर ने आगे कहा है कि डील में कई तरह की अनदेखी की गई थी. डील में एक ही वेंडर का नाम क्यों तय हुआ? जबकि डील के लिए तीन वेंडरों ने नाम तय किए गए थे. देश जानना चाहता है कि घूस की रकम किसे मिली. कांग्रेस कुतर्कों से झूठ को सच को झूठ साबित करने में जुटी है.
 
बीजेपी सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कांग्रेस की तत्कालीन यूपीए सरकार पर ताबड़तोड़ हमले किए. स्वामी ने ऑगस्ता घोटाले पर बोलते हुए कहा कि यूपीए सरकार में जानबूझकर नियमो को तोड़ा-मरोड़ा गया. उन्होंने कहा कि नेवी का अकेला अधिकारी इतना बड़ा घोटाला नहीं कर सकता है. स्वामी ने कहा कि इटली में जिन लोगों ने सौदे के लिए घूस दी वे जेल में हैं. कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया इस सरकार में शुरू हुई है. स्वामी ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने एके एंटनी को नजरअंदाज किया. उन्‍होंने सवालिया लहजे में पूछा कि वह कौन सी ताकत थी जिसने तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी को खरीदी से संबंधित शर्त बदलने को मजबूर किया.
 
क्या है मामला? 
यूपीए-1 सरकार के वक्त 2010 में अगस्ता वेस्टलैंड से वीवीआईपी के लिए 12 हेलिकॉप्टरों की खरीद की डील हुई थी. डील के तहत मिले 3 हेलिकॉप्टर आज भी दिल्ली के पालम एयरबेस पर खड़े हैं. इन्हें इस्तेमाल में नहीं लाया गया. डील 3,600 करोड़ रुपए की थी. टोटल डील का 10% हिस्सा रिश्वत में देने की बात सामने आई थी. इसके बाद यूपीए सरकार ने फरवरी 2010 में डील रद्द कर दी थी. तब एयरफोर्स चीफ रहे एसपी त्यागी समेत 13 लोगों पर केस दर्ज किया गया था. जिस मीटिंग में हेलिकॉप्टर की कीमत तय की गई थी, उसमें यूपीए सरकार के कुछ मंत्री भी मौजूद थे. इस वजह से कांग्रेस पर भी सवाल उठे थे.