नई दिल्ली. देश की राजनीति की चाबी माने जाने वाली 403 सीटों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में लंबे समय से 20 विधायकों के आस-पास लटकी कांग्रेस को 200 तक ले जाने के लिए राहुल गांधी या प्रियंका गांधी को सीएम कैंडिडेट के तौर पर पेश करने के प्रशांत किशोर के मास्टरप्लान पर कांग्रेस पार्टी के अंदर ही महाभारत छिड़ गई है.
 
मामला चूंकि पार्टी के प्रथम परिवार यानी नेहरू-गांधी परिवार से जुड़ा है इसलिए कोई नेता कुछ खुलकर नहीं बोल रहा लेकिन ज्यादातर नेताओं की परेशानी ये है कि राहुल या प्रियंका को सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट करना उनके लिए गांधी परिवार के वारिसों के डिमोशन का मसला है. 
 
कांग्रेसियों के लिए राहुल गांधी कितने बड़े नेता हैं ये सिर्फ इस बात से समझा जा सकता है कि जब नरेंद्र मोदी को बीजेपी ने पीएम कैंडिडेट बना दिया था तब भी वो यही कहते रहे कि मोदी और राहुल की तुलना नहीं हो सकती क्योंकि मोदी एक राज्य के भर के नेता हैं जबकि राहुल राष्ट्रीय नेता हैं. ऐसे में राहुल या प्रियंका का सीएम कैंडिडेट बन जाना उनकी नज़र में उनके राष्ट्रीय नेताओं का प्रांतीय नेता हो जाने का संकट है.
 
7 चुनिंदा पत्रकारों के साथ लंच में लीक हुआ ये मास्टरप्लान
 
ये बात दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा का विषय बन चुका है कि प्रशांत किशोर ने किस तरह सिर्फ चुनिंदा 7 पत्रकारों को लंच पर बुलाकर अपने मास्टरप्लान का ये हिस्सा लीक किया कि उनके प्लान में राहुल गांधी पहले नंबर और प्रियंका गांधी दूसरे नंबर पर यूपी की सीएम कैंडिडेट हैं. एक खास बात ये भी है कि ये चुनिंदा 7 पत्रकार या तो ब्राह्मण हैं या ठाकुर जिनका यूपी की राजनीति में बड़ा प्रभाव है.
 
सूत्रों का कहना है कि प्रशांत किशोर ने सारे गुणा-गणित करके ये मान लिया है कि यूपी में कांग्रेस की वापसी का रास्ता ब्राह्मण और राजपूतों की अपार मदद के बिना संभव नहीं है. प्रशांत के प्लान में बैक-अप थ्योरी ये है कि अगर ब्राह्मणों और राजपूतों को कांग्रेस आगे करे, उन्हें भरोसा दिला दे कि कांग्रेस ही उनके हित की रक्षा कर सकती है तो बीजेपी के खिलाफ अल्पसंख्यक वोट खुद ही कांग्रेस की तरफ मूव करेंगे. 
 
ब्राह्मण नेता ही हो यूपी में कांग्रेस का सीएम कैंडिडेट
 
प्रशांत का प्लान ये है कि राहुल, प्रियंका या फिर कोई और ब्राह्मण नेता जो यूपी की राजनीति में अचानक सरगर्मी ला दे, उसे कांग्रेस को सीएम कैंडिडेट बनाना चाहिए क्योंकि राज्य में 13 परसेंट ब्राह्मण वोटर हैं जिन्हें कांग्रेस थोड़ी मेहनत करके वापस ला सकती है. प्रशांत का आकलन है कि ब्राह्मण, राजपूत, मुस्लिम, थोड़े दलित और थोड़े ओबीसी वोटों के साथ कांग्रेस 27-28 परसेंट तक वोट ला सकती है जो उसे सरकार में लाने के लिए पर्याप्त हैं.
 
प्रशांत किशोर ने अपने मास्टरप्लान के जरिए कांग्रेस को साफ-साफ कह दिया है कि अगर राहुल या प्रियंका यूपी चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए तैयार नहीं होते हैं तो 2017 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को 20 विधायकों के ब्रैकेट से बाहर ले जाना मुश्किल होगा. बस एक ही आस है 200 के ब्रैकेट में पार्टी को ले जाने का कि पार्टी के युवराज खुद यूपी के मोर्चे पर नेतृत्व करें.
 
नीतीश ने 2012 में कहा था कि राहुल पीएम से पहले सीएम बनें
 
वैसे नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार का चुनावी अभियान देख चुके प्रशांत किशोर की इस सलाह के जैसी ही नसीहत राहुल गांधी को नीतीश कुमार ने 2012 में ही दिया था जब वो बीजेपी के साथ थे. नीतीश ने कहा था कि अगर राहुल को प्रधानमंत्री बनना है तो उनको पहले मुख्यमंत्री बनना चाहिए. 
 
कांग्रेस में ऐसे नेता भी हैं जो ये मान रहे हैं कि प्रशांत किशोर ऐसा नीतीश कुमार के लिए 2019 का रास्ता साफ करने की नीयत से चाहते हैं. इन नेताओं को यकीन है कि यूपी में पार्टी का बहुत कुछ होने वाला है नहीं इसलिए राहुल या प्रियंका के नेतृत्व में लड़कर हारे तो इन दोनों की 2019 की दावेदारी कमजोर पड़ेगी.
 
राजनीति में प्रशांत किशोर भी खाने लगे हैं अब मुंह की
 
नीतीश कुमार ने बिहार की जीत के बाद प्रशांत किशोर को असम में कांग्रेस के नेतृत्व में सेकुलर एलायंस बनाने के लिए भेजा था लेकिन उसमें वो नाकाम रहे. एआईडीयूएफ चीफ बदरुद्दीन अज़मल ने असम में दूसरे और आखिरी चरण के चुनाव से पहले ट्वीट करके इस एलायंस के न बन पाने के लिए कांग्रेस को कटघरे में खड़ा किया था.
 
पंजाब में आम आदमी पार्टी के बड़े नेता और सिख दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रहे वरिष्ठ वकील एचएस फूल्का से मिलने की कोशिश के आरोप से घिरे प्रशांत किशोर सफाई देते फिर रहे हैं कि फूल्का से बात करने वाला भी आम आदमी पार्टी का आदमी है और उनका नाम बेवजह घसीटा जा रहा है.
 
यूके में रहने वाले डॉक्टर बिपिन झा ने फूल्का से बात की और कहा कहा कि सिख दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने का काम वो अगर आम आदमी पार्टी के जरिए नहीं कर पा रहे हैं तो उन्हें प्रशांत किशोर से मिलना चाहिए ताकि प्रशांत कांग्रेस के नेताओं से इस पर बात कर सकें. 
 
क्या फूल्का को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे प्रशांत किशोर ?
 
जाहिर है कि बिपिन झा आम आदमी पार्टी के समर्थक हों या नहीं, उनके बयान से साफ है कि वो प्रशांत किशोर और फूल्का की मीटिंग करवाना चाहते थे और वो भी इस मकसद से कि फूल्का को लेकर प्रशांत आगे कांग्रेस के नेताओं से बात कर सकें. 
 
पंजाब में विधानसभा चुनाव होना है और ये बात मोटा-मोटी साफ है कि मौजूदा सरकार के खिलाफ सत्ताविरोधी वोट का बंटवारा कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच होगा. इस बीच कई सर्वे आए हैं जिन्हें आम आदमी पार्टी को बढ़त दिखाई गई है जो सत्ता में वापसी के लिए बेचैन कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है. ऐसे में आम आदमी पार्टी के एक बड़े चेहरे को कांग्रेस की रणनीति देख रहा कोई आदमी मिलना चाहता है तो आखिर क्यों?