नई दिल्ली. चुनाव आने से पहले सियासी गलियारों में प्रशांत किशोर को लेकर होड़ लगी रहती है. पिछले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रचार की कमान संभालने के बाद प्रशांत किशोर ने नीतीश के चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी संभाली और जीत भी दिलाई. अब प्रशांत किशोर यूपी और पंजाब चुनाव के लिए राहुल के सबसे बड़े रणनीतिकार बन गए हैं. 
 
PK का चुनावी वॉर रुम
 
प्रशांत किशोर के वॉर रुम में सब कुछ तय होता है. चुनाव प्रचार में कौन नेता किससे मिलेगा? कौन नेता कब क्या बोलेगा? राहुल जब यूपी में बोलेंगे तो क्या बोलेंगे? पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह किस रंग की पगड़ी पहनेंगे? ये सब प्रशांत किशोर की टीम वॉर रुम में करती है. यूपी में कांग्रेस अपनी खोई हुई जमीन कैसे वापस ले और पंजाब में पंजे का दबदबा पहले जैसा कैसे हो इसकी पूरी स्ट्रेटजी प्रशांत किशोर अपने वॉर रुम में बैठकर बनाते हैं. प्रशांत का वॉर रुम दिल्ली का 15 गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पर स्थित है.
 
PK ने पूरी की ‘मिशन पंजाब’ की तैयारी
 
 
प्रशांत किशोर ने मिशन पंजाब के लिए भी बड़ी प्लानिंग की है. प्रशांत किशोर की टीम ने पंजाब का दौरा करके एक सर्वे रिपोर्ट राहुल गांधी को दी है. जिसमें कहा गया है कि आम आदमी पार्टी पंजाब में कांग्रेस का खेल बिगाड़ रही है, इसलिए चुनाव प्रचार भी उसी की तर्ज पर किया जाए. इसके बाद प्रशांत किशोर की सलाह पर राहुल गांधी ने मिशन पंजाब तैयार किया. प्रशांत किशोर चाहते हैं कि पंजाब का चुनाव कैप्टन अमरिंदर सिंह के चेहरे पर लड़ा जाए इसलिए उन्होंने नारा दिया है- ‘पंजाब दा कैप्टन और कैप्टन दा पंजाब’.
 
कौन हैं प्रशांत किशोर ?
 
 
39 साल के प्रशांत किशोर बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले हैं . वो दक्षिण अफ्रीका में यूनाइटेड नेशंस के हेल्थ वर्कर रह चुके हैं. 2011 में प्रशांत भारत लौटे थे. तब गुजरात की तत्कालीन मोदी सरकार ने उन्हें सामाजिक क्षेत्र का नीति सलाहकार बनाया था. इसी दौरान उन्होंने राजनीतिक पार्टियों के चुनाव प्रचार और रणनीति बनाने को लेकर काम करना शुरू किया, कंपनी बनाई, नाम रखा- सीएजी. प्रशांत कुमार की टीम में 400 लोग काम करते हैं जिनमें IIM और IIT से पास लड़के भी हैं. 
 
मोदी-नीतीश का दे चुके हैं साथ
 
 
सबसे पहले प्रशांत किशोर ने बीजेपी और नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर गुजरात में कैंपेन शुरू किया. 2012 में उन्होंने गुजरात विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कैंपेन की कमान अपने हाथों में ली. इसके बाद 2014 में मोदी ने लोकसभा चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी भी प्रशांत किशोर को सौंपी. उस दौरान प्रशांत किशोर गुजरात के सीएम हाऊस में रहकर रणनीति तैयार करते रहे और मोदी के दूसरे करीबी अमित शाह उसे देशभर में फैलाते रहे. 2014 में बंपर जीत के बाद बीजेपी ने प्रशांत को ज्यादा अहमियत नहीं दी. कुछ ही महीने बाद बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने प्रशांत कुमार को चुनाव प्रचार का जिम्मा सौंपा. प्रशांत ने नीतीश की विकास छवि को घर घर से जोड़ा. बिहार में बहार हो..नीतीशे कुमार हो.. इस नारे और गाने को हिट कराया. नीतीश की खोई जमीन वापस दिला दी. अब राहुल गांधी और कांग्रेस ने प्रशांत किशोर पर भरोसा जताया है.
 
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