नई दिल्ली: उत्तराखंड की राजनीति में काफी सियासी घमासान मचा हुआ है. इस घमासान में राष्ट्रपति शासन के विकल्प पर विचार की अटकलों की पृष्ठभूमि में कैबिनेट बैठक हुई है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के असम से वापस लौटते ही कैबिनेट की बैठक हुई. बैठक  में शामिल होने के लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरूण जेटली समेत कई मंत्री पहुंचे. हालांकि कैबिनेट ने की आपात बैठक में फिलहाल राष्ट्रपति शासन का फैसला टल गया है. 
 
मोदी की अगुवाई में उत्तराखंड पर विचार
हालांकि इस स्थिति में कोई अनुमान लगाने से पहले यह देखना होगा कि मोदी सरकार विश्वास मत परीक्षण से पहले क्या करती है. केंद्र सरकार को विधायकों के बगावत से पैदा राज्य की हालिया स्थिति के बारे में राज्यपाल के के पॉल से रिपोर्ट मिल गई है. असम की यात्रा संक्षिप्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाई. करीब एक घंटे चली इस बैठक में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने समेत केंद्र के सामने उपलब्ध विभिन्न विकल्पों पर विचार किया गया है.
 
राष्ट्रपति से मिले BJP नेता
उत्तराखंड के बीजेपी के नेता आज राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से मिले. उन्होंने उत्तराखंड की सरकार को बर्खास्त करने की मांग रखी है. बीजेपी नेताओं मुख्यमंत्री के स्टिंग आपरेशन को भी राष्ट्रपति के सामने रखा. बीजेपी नेताओं ने कहा कि हरिश रावत को सत्ता में एक क्षण भी रहने का अधिकार नहीं है. हमने राज्यपाल को बताया था कि प्रदेश सरकार खरीद-फरोख्त में संलग्न होगी. हमारी समझ में यह नहीं आ रहा है कि विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए इतना समय क्यों दिया गया. 
 
‘उत्तराखंड में लागू हो राष्ट्रपति शासन’
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुण ने उत्तराखंड सरकार को तुरंत बर्खास्त कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है. बहुगुणा मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ बागियों का नेतृत्व कर रहे हैं. बहुगुणा ने कहा, “मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए. अगर वह इस्तीफा नहीं देते हैं तो मैं राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने का आग्रह करता हूं और उसके बाद ताजा चुनाव कराया जाना चाहिए.”