देहरादून. उत्तराखंड में राजनीति में घमासान के बीच मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने समर्थक विधायकों के साथ आज राज्यपाल से मिलकर अपना पक्ष रखेंगे और ताजा राजनीतिक हालात पर राय देने का भी अनुरोध करेंगे. हरीश रावत ने इस मामले पर कहा कि किसी के दबाव में नहीं झुकूंगा. मेरे लिए राज्य का हित पहले है. उन्होंने बताया कि यदि सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाया तो इस्तीफा दे दूंगा. 
 
उन्होंने कहा है कि अभी किसी ने इस्तीफा नहीं दिया है. कई विधायक हमारे संपर्क में हैं. बागियों में से पांच विधायकों ने संपर्क किया है. हम गलती मानने वालों को माफ करेंगे. हमारे पास समर्थन है बहुमत साबित करेंगे. बताया जा रहा है कि शाम 7:30 सीएम रावत विधायकों के साथ राज्यपाल केके पॉल से मुलाकात करेंगे.
 
आज अमित शाह से मिलेंगे बागी विधायक
कांग्रेस के 9 बागी और बीजेपी के 26 विधायक देर रात चार्टर्ड प्लेन से नई दिल्ली पहुंच चुके हैं. माना जा रहा है कि शनिवार को यहां बीजेपी नेताओं के साथ मीटिंग में आगे की स्ट्रेटजी तय होगी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिलेंगे. उत्तराखंड के विधायकों को गुड़गांव के एक होटल में ठहराया गया है. बागी कांग्रेसी विधायकों के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें हैं. कांग्रेस की सरकार अल्पमत में आ गई है. 
 
राज्यपाल के सामने BJP विधायकों की परेड
बीजेपी ने भी हरीश रावत का इस्तीफा मांगा है. पूर्व सीएम और बीजेपी नेता रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि रावत सरकार अल्पमत में आ गई है और सीएम को इस्तीफा देना चाहिए. बीजेपी के विधायकों ने शुक्रवार शाम को राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया. बीजेपी के समर्थन में 35 विधायकों की देर रात राज्यपाल के सामने परेड भी कराई. 
 
देखिए पूरा खेल क्या है ?
70 सीटों वाली उत्तराखंड विधानसभा में कांग्रेस के 36, बीजेपी के 28, तीन निर्दलीय और बीएसपी के 2 विधायकों के साथ ही एक विधायक यूकेडी का है. छह विधायक खुलकर हरीश रावत सरकार से नाराजगी जाहिर करते रहे हैं. इन सभी को बहुगुणा खेमे में माना जाता है. सबकी अपनी-अपनी मांग है. पूर्व मुख्यमंत्री और अब विधायक विजय बहुगुणा जुलाई में खाली हो रही राज्यसभा सीट चाहते हैं. हरीश रावत के धुर विरोधी हरक सिंह रावत अपने चहेतों के लिए कम से कम तीन विधानसभा सीटों की मांग कर रहे हैं. जिनमें खुद के लिए डोईवाला सीट पर सीएम हरीश रात से पक्का आश्वासन चाहते हैं. दूसरी तरफ बीजेपी की नजर कम से कम दस असंतुष्ट विधायकों पर है.