नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल के तृणमूल कांग्रेस नेताओं के एक स्टिंग ऑपरेशन में पकड़े जाने के बाद पार्टी नेताओं में इसे अंजाम देने वाले न्यूज पोर्टल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने को लेकर एक राय नहीं है. इस स्टिंग ऑपरेशन में तृणमूल के कुछ नेताओं को रिश्वत लेते देखा गया है. 
 
हालांकि, शुरुआत में पार्टी ने कड़ा तेवर दिखाते हुए इसे ‘गढ़ा हुआ’ करार दिया था. लेकिन, पार्टी के ही कुछ नेताओं ने पार्टी मुखिया ममता बनर्जी से कोलकाता में मुलाकात कर कहा कि इस वीडियो को अदालत में दुर्भावनापूर्ण और निहित स्वार्थो से प्रेरित साबित करना बेहद कठिन होगा.
 
तृणमूल के एक नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, “पार्टी का एक धड़ा इसे लेकर संशय में है. यह भावना बढ़ रही है कि पार्टी अगर इस मामले को अदालत में ले जाती है तो और ज्यादा छीछालेदर होगी.” उन्होंने कहा, “अगर अदालत इस मामले में न्यायिक जांच या सीबीआई जांच का आदेश दे देती है तो मुश्किल और भी बढ़ जाएगी.” इससे पहले पार्टी काफी गंभीरता से कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर रही थी. पूर्व रेल मंत्री और ममता बनर्जी के करीबी मुकुल रॉय ने कहा कि यह वीडियो नकली है. उन्होंने मामला अदालत में ले जाने की बात कही थी. 
 
तृणमूल सूत्रों ने कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने कलकत्ता हाईकोर्ट में सीबीआई जांच के लिए याचिका दायर की तो पार्टी के रणनीतिकार अदालत जाने के मामले में ठंडे पड़ गए. पार्टी सूत्रों ने बताया, “इससे पहले शारदा घोटाले ने भी तृणमूल की साख को काफी नुकसान पहुंचा था जब अदालत ने सीबीआई जांच का आदेश दे दिया था.” इस वीडियो टेप में तृणमूल के पांच सांसदों सौगत रॉय, सुल्तान अहमद, सुवेंदु अधिकारी, काकोली घोष दस्तीदार और प्रसून बनर्जी और राज्यसभा के मुकुल रॉय कथित रूप से रिश्वत लेते देखे गए हैं.