पटना. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने बसपा सुप्रीमो मायावती से एनडीए में शामिल होने और यूपी का विधानसभा चुनाव साथ लड़ने की अपील की है. मांझी ने कहा कि मायावती के साथ-साथ सभी राजनीतिक और गैर-राजनीतिक दलित संगठनों को एक मंच पर आना चाहिए.
 
पटना में हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के दलित प्रकोष्ठ की बैठक में मांझी ने कहा कि दलितों की अबादी 25 फीसदी है लेकिन पुराने आकड़ों के आधार पर महज 16 फीसदी आरक्षण मिल रहा है और उसमें भी दलितों के सीट भरे नहीं जा रहे है. 
 
दलितों के लिए अलग निर्वाचन की मांग पर करेंगे आंदोलन
 
मांझी ने राजनीति में दलितों के वाजिब प्रतिनिधित्व का सवाल उठाते हुए कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर ने पृथक निर्वाचन का प्रयास किया था जिसे महात्मा गांधी के हस्तक्षेप के कारण लागू नहीं किया जा सका. इस वजह से आज दलित नेताओं को गैर दलित वोटर्स पर निर्भर रहना पड़ता है. मांझी ने कहा कि हमें फिर से पृथक निर्वाचन पर विचार करना होगा और उनकी पार्टी इसके लिए आंदोलन करेगी.
 
महागठबंदन सरकार में जंगलराज की वापसी हो गई है
 
मांझी ने कहा कि बिहार के लोगों को भरमा कर महागठबंधन वालों ने सरकार बना ली और अब बिहार में फिर से जंगलराज की वापसी हो गई है. उन्होंने कहा कि आपराधिक घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है. कानून व्यवस्था का ये हाल है कि दलित बच्चों को स्कूल से भगा दिया जा रहा है.
 
उन्होंने कहा कि दलितों को सिर्फ शिक्षा, नौकरी और राजनीति में नहीं बल्कि निजी क्षेत्र, व्यवसाय में निवेश और न्यायपालिका में भी आरक्षण मिलना चाहिए. मांझी ने कहा कि इसके लिए दलितों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा. 
 
इस मौके पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वृषिण पटेल ने कहा कि ये दलितों की पार्टी है और दलित का अर्थ किसी जाति से नहीं, उन तबकों से है जिनके लिए बाबा साहेब पूरी उम्र संघर्ष किए. पटेल ने कहा कि उनकी पार्टी दलितों की समस्याओं को चिह्नित करके समाधान की दिशा में काम करेगी.