नई दिल्ली. नेशनल हेराल्ड मामले में शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी और अन्य नेताओं की दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी के बाद कानूनी तौर पर क्या-क्या हो सकता है, इस पर इंडिया न्यूज़ के लीगल रिपोर्टर आशीष सिन्हा की खास रिपोर्ट.
 
अदालत में सबसे पहले क्या होगा ?
 
सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत अन्य आरोपियों को इस मामले में सबसे पहले मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश होना होगा. इस दौरान उनके वकील उनके साथ रहेंगे. पेशी के बाद सबसे पहले उनकी हाजिरी लगेगी. अगर कोई पेश नहीं होता है तो उनके वकील को इसका कारण बताना होगा. पेशी से छूट के लिए मेडिकल ग्राउंड आदि लिए जाते हैं. उक्त ग्राउंड पर कोर्ट पेशी से छूट दे भी सकता है और नहीं भी.
 
सोनिया-राहुल की हाजिरी के बाद क्या होगा ?
 
कानूनी जानकार के अनुसार कंप्लेंट केस के मामलों में आम तौर पर पेशी के बाद आरोपी को जमानत दी जाती है और बेल बॉन्ड भरने के लिए कहा जाता है. यह कोर्ट पर निर्भर करता है कि वह कितने का बेल बॉन्ड भरने कहे. बेल बॉन्ड भरने से अगर कोई आरोपी इनकार करे तो उसे जेल जाना होता है.
 
इस मामले में शिकायतकर्ता बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी व अन्य कांग्रेस नेताओं के खिलाफ धोखाधड़ी, फंड के गलत इस्तेमाल आदि का आरोप लगाया है. कोर्ट ने सोनिया, राहुल गांधी, मोती लाल बोरा और अन्य नेताओं के नाम समन जारी करते हुए उन्हें पेश होने के लिए कहा था.
 
स्वामी ने बेल का विरोध किया तो बहस होगी
 
पेशी के बाद इन्हें कोर्ट के सामने अर्जी दाखिल कर बताना होगा कि समन के आदेश का पालन करते हुए ये पेश हो रहे हैं और बेल की अर्जी दाखिल करने का प्रावधान है. आम तौर पर ऐसे मामले में कोर्ट सीधे आरोपी को बेल बॉन्ड भरने के लिए कह सकती है. लेकिन इस मामले में अगर शिकायती जमानत का विरोध करे तो फिर उस पर दोनों पक्षों में बहस हो सकती है. वैसे प्राइवेट कंप्लेंट मामले में सीधे बेल बॉन्ड भरने के लिए कहा जाता है.
 
क्या सोनिया-राहुल को जमानती पेश करना होगा ?
 
यह कोर्ट पर निर्भर करता है कि वह आरोपियों को जमानती लाने के लिए कहे या फिर पर्सनल बॉन्ड भरने के लिए कहे. जब किसी मामले में जमानती लाने के लिए कहा जाता है और जमानती के बारे में संदेह हो या फिर वह ऐसा शख्स न हो जिसे कोई जानता हो तो कोर्ट उक्त जमानती का वेरिफिकेशन भी करवाता है. कोर्ट अगर यह मानता है कि पर्सनल बॉन्ड भरवा कर छोड़ा जा सकता है तो वह ऐसा करने का भी आदेश दे सकता है.
 
बेल बॉन्ड न भरने की सूरत में क्या होगा ?
 
चूंकि यह मामला कंप्लेंट केस का है और कंप्लेंट के आधार पर समन जारी हुआ है, ऐसे में बेल बॉन्ड भरने के बाद आरोपी को जमानत देने का प्रावधान है. लेकिन आरोपियों को बेल बॉन्ड भरना होगा तभी उन्हें छोड़ा जाएगा. अगर कोई आरोपी बेल बॉन्ड नहीं भरता है तो कोर्ट को यह अधिकार है कि वह उसे जेल भेज दे. जब सारे आरोपी कोर्ट के आदेश के तहत बेल बॉन्ड भर देंगे तो उसके बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी.
 
बेल बॉन्ड भरने के बाद अदालत में आगे क्या होगा ? 
बेल बॉन्ड के बाद प्री चार्ज एविडेंस के लिए कोर्ट या तो तारीख लगा सकती है या फिर आगे की सुनवाई भी कर सकती है. प्री चार्ज पर क्या बहस होती है, ट्रायल कब हो सकता है, इस मामले में शिकायती द्वारा पेश साक्ष्यों के आधार पर दलीलें पेश की जाएंगी और इस दौरान बचाव पक्ष उन साक्ष्यों के साथ जिरह करेंगे और फिर कोर्ट आदेश पारित करेगा.
 
ट्रायल कब शुरू होंगे और आगे क्या होगा ?
 
अगर पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए जाते हैं तो आरोपियों को इसी स्टेज पर आरोपमुक्त कर दिया जाएगा और अगर साक्ष्य पाए गए तो आरोप तय किए जाएंगे. आरोप तय होने की सूरत में ट्रायल शुरू होगा. तब गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे और बचाव पक्ष को बयान का मौका दिया जाएगा. कोर्ट में दोनों पक्षों के वकील अपनी-अपनी दलीलें पेश करेंगे. बहस और दलील के बाद कोर्ट का फैसला आएगा.
 
सोनिया-राहुल पर क्या हैं स्वामी के आरोप ?
 
नेशनल हेराल्ड मामले में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने केस कर रखा है. उनका आरोप है कि कांग्रेस नेताओं ने नेशनल हेराल्ड की संपत्ति लोन देकर अपने नाम कर ली है. इस मामले में आरोपी बनाए गए सोनिया, राहुल  और दूसरे नेताओं ने हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली थी.