नई दिल्ली. डीडीसीए में भ्रष्टाचार को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ आम आदमी पार्टी की पीसी के बाद महज दो घंटे के अंदर बीजेपी और डीडीसीए के अलग-अलग संवाददाता सम्मेलन और फिर खुद जेटली के बयान देने के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने जेटली से सवाल किया है कि वो जांच से क्यों भाग रहे हैं.
 
केजरीवाल ने ट्विटर पर तीन ट्वीट किए हैं और कहा है, “जेटली जी के खिलाफ बहुत ही गंभीर आरोप हैं. बहुत बड़ी रकम का मामला है. निष्पक्ष जांच के लिए उनको या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या उनको पद से हटा देना चाहिए.” केजरीवाल ने कहा है कि अगर जेटली जी को मीडिया में उनके खंडन करने के आधार पर छोड़ देंगे तो क्या इसी तरह कोयला घोटाला और 2जी घोटाला के सारे आरोपियों को भी छोड़ देना चाहिए.
 

 
 
केजरीवाल ने सवाल उठाया है, “क्या मीडिया में जेटली जी के खंडन को दैविक सच के तौर पर लिया जा सकता है? उनके खिलाफ बहुत ही गंभीर आरोप हैं. वो जांच से भाग क्यों रहे हैं? “
 
डीडीसीए पर अनियमितता के क्या हैं आरोप ?
 
डीडीसीए में अनियमितता पर दिल्ली सरकार के विजिलेंस विभाग ने चेतन सांघी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी. सांघी ने हाल में अपनी रिपोर्ट पेश की जिसमें उन्होंने डीडीसीए में घोटालों का खुलासा किया है. रिपोर्ट में 2002 से अब तक की जांच की गई है.
 
डीडीसीए ने फ़िरोज़शाह कोटला के दोबारा निर्माण का फैसला लिया था जो 2002 से 2007 तक चला. इस पर 24 करोड़ ख़र्च होने थे पर ख़र्च 114 करोड़ रुपए हुए. रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टेडियम के अधिकतर कामों के लिए टेंडर निकालने का कोई रिकॉर्ड नहीं है. इसके इलावा डीडीसीए ने स्टेडियम में 12 कॉर्पोरेट बॉक्स बनाए जो उचित प्रक्रिया के बिना कंपनियों को लीज़ कर दिए गए.
 
रिपोर्ट के अनुसार स्टेडियम के निर्माण में शामिल अधिकतर कंपनियां डीडीसीए के अधिकारियों की ‘फ्रंट’ कंपनियां हैं इसीलिए बजट जान-बूझकर कई गुना बढ़ाया गया. डीडीसीए फ़िरोज़शाह स्टेडियम को शहरी विकास मंत्रालय से लीज़ पर लेकर चलाता है. इसके बदले डीडीसीए मंत्रालय को हर साल लगभग 25 लाख रुपए देता है. मंत्रालय को आज की दर से 16 करोड़ रुपए सालाना मिलने चाहिए. रिपोर्ट के अनुसार इस विवाद के कारण डीडीसीए के पास स्टेडियम चलाने के लिए फिलहाल कोई लीज़ नहीं है.