नई दिल्ली. दिल्ली सचिवालय में सीबीआई रेड के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा वित्त मंत्री अरुण जेटली पर लगाए गए आरोपों का जवाब DDCA ने दिया है. डीडीसीए उपाध्यक्ष चेतन चौहान ने कहा कि जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं उनका वो खंडन करते हैं.
 
डीडीसीए के अधिकारियों के साथ मीडिया के सामने आए चेतन चौहान ने कहा कि फिरोजशाह कोटला स्टेडियम को दोबारा बनाने में जो खर्च हुआ है उसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं बरती गई है. 
 
कोटला स्टेडियम 114 करोड़ में बना, सरकारी कंपनी EPIL को दिया ठेका
 
चेतन चौहान ने कहा कि कोटला क्रिकेट स्टेडियम को दोबारा बनाने पर 114 करोड़ की रकम खर्च की गई. इस निर्माण का ठेका भी सरकारी कंपनी EPIL (इंजीनियर्स प्रोजेक्ट इंडिया लिमिटेड) को ही दिया गया था.
 
चेतन ने स्टेडियम निर्माण के लिए डीडीसीए के पूर्व अध्यक्ष अरुण जेटली का धन्यवाद किया और कहा कि जेटली के कार्यकाल में बहुत शानदार काम हुआ. उन्होंने कहा कि जेटली के कार्यकाल में ही स्टेडियम की क्षमता 26 हज़ार से बढ़कर 41 हज़ार हुई.
 
चेतन ने कहा कि जितनी भी कामकाज की गड़बड़ी के मामले सामने आ रहे हैं और उन पर जो जुर्माना लगाया जा रहा है, डीडीसीए उसे भर रहा है. वित्तीय अनियमितता के आरोप पर चेतन ने कहा कि इस मामले में डीडीसीए ने कार्रवाई की है और मामला अब कोर्ट में है इसलिए इस पर वो कुछ और नहीं बोलेंगे. 
 
डीडीसीए पर अनियमितता के क्या हैं आरोप ?
 
डीडीसीए में अनियमितता पर दिल्ली सरकार के विजिलेंस विभाग ने चेतन सांघी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी. सांघी ने हाल में अपनी रिपोर्ट पेश की जिसमें उन्होंने डीडीसीए में घोटालों का खुलासा किया है. रिपोर्ट में 2002 से अब तक की जांच की गई है.
 
डीडीसीए ने फ़िरोज़शाह कोटला के दोबारा निर्माण का फैसला लिया था जो 2002 से 2007 तक चला. इस पर 24 करोड़ ख़र्च होने थे पर ख़र्च 114 करोड़ रुपए हुए. रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टेडियम के अधिकतर कामों के लिए टेंडर निकालने का कोई रिकॉर्ड नहीं है. इसके इलावा डीडीसीए ने स्टेडियम में 12 कॉर्पोरेट बॉक्स बनाए जो उचित प्रक्रिया के बिना कंपनियों को लीज़ कर दिए गए.
 
रिपोर्ट के अनुसार स्टेडियम के निर्माण में शामिल अधिकतर कंपनियां डीडीसीए के अधिकारियों की ‘फ्रंट’ कंपनियां हैं इसीलिए बजट जान-बूझकर कई गुना बढ़ाया गया. डीडीसीए फ़िरोज़शाह स्टेडियम को शहरी विकास मंत्रालय से लीज़ पर लेकर चलाता है. इसके बदले डीडीसीए मंत्रालय को हर साल लगभग 25 लाख रुपए देता है. मंत्रालय को आज की दर से 16 करोड़ रुपए सालाना मिलने चाहिए. रिपोर्ट के अनुसार इस विवाद के कारण डीडीसीए के पास स्टेडियम चलाने के लिए फिलहाल कोई लीज़ नहीं है.