नई दिल्ली. राज्यसभा में संविधान पर विशेष चर्चा के समापन के मौके पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संविधान ही हमारा एकमात्र मार्गदर्शक है और सिर्फ संविधान ही हमारे देश में समता ला सकता है. पीएम ने कहा कि देश तू-तू, मैं-मैं से नहीं बल्कि साथ आगे बढ़ने से चलता है. बिखरने के लिए तो बहुत बहाने मिल सकते हैं, हमें जुड़ने के अवसर खोजने होंगे.
 
मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भी दोनों सदनों के सहयोग की बात कही थी. दोनों सदनों के सहयोग पर ही संसदीय सिस्टम की सफलता निर्भर करती है. राज्य सभा की अहमियत को बिक्लुल भी कम करके नहीं आंका जा सकता. राष्‍ट्र को बनाने के लिए जिन महापुरुषों ने काम किया, उनके बारे में युवा पीढ़ी को जागरूक करना होगा. 
 
मोदी ने कहा कि हर किसी के सकारात्‍मक योगदान से राष्‍ट्र बनता है. हम पक्ष और विपक्ष से उठकर एक भी तो हों. बाबा अंबेडकर के कामों को देश नकार नहीं सकता. बाबा साहब चाहते थे कि उत्पादकता का सामान वितरण हो और हमें इसी दिशा में काम करना चाहिए. संविधान हमें जोड़ने की ताकत देता है और यही ताकत देश में व्याप्त असमानता और भेदभाव को ख़त्म कर सकती है.
 
मोदी ने कहा कि हम संविधान के प्रकाश में स्थितियां नहीं देखते हैं इसलिए कानून बनाते हैं और फिर संशोधन करते हैं. संविधान निर्माताओं को कभी एथिक कमेटी का निर्माण नहीं करना पड़ा, लेकिन हम लोगों को इसकी ज़रुरत पड़ी. 14 अगस्‍त 1947 को डॉ. राधाकृष्‍णन ने जो कहा, वह हमारी जिम्‍मेदारी है. भ्रष्‍टाचार, भाई-भतीजावाद और मुनाफाखोरी को खत्‍म करना होगा. हमारा संविधान सामाजिक दस्‍तावेज भी है. इसे जीकर दिखाना हमारा दायित्‍व भी बनता है. समता, ममता, समभाव, ममभाव हो, उसी से समाज चलेगा.