नई दिल्ली. संविधान पर चर्चा के दौरान आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा कि सरकार आरक्षण पर संविधान में कभी संशोधन नहीं करेंगे. संविधान में कोई बदलाव नहीं होगा, यह आत्महत्या जैसा हो सकता है. मोदी ने अपने भाषण में बाबा साहब अंबेडकर, जवाहर लाल नेहरू, महात्मा गांधी, राममनोहर लोहिया, ज्योतिबा फुले, राजा राम मोहन राय, नरसिंह मेहता और जयप्रकाश नारायण का ज़िक्र किया. 
 
पेश हैं PM मोदी के भाषण की प्रमुख 25 बातें: 
1. इस सरकार का इकलौता धर्म है- इंडिया फर्स्ट. यह सरकार सिर्फ एक ही पवित्र किताब से चलती है, वह है- संविधान. कोई भी संविधान नहीं बदल सकता है. इसे लेकर भ्रम जरूर फैलाया जा रहा है. बाबा साहब का दर्द संविधान में शब्द के रूप में उभरा. उन्होंने बहुत कुछ झेला, लेकिन संविधान बनाते समय देश के लिए सबसे अच्छी बातें शामिल कीं. उन्होंने अपमान का जहर पी लिया. 
 
2. मोदी ने अपनी स्पीच में पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा- एक बार डॉ. लोहिया ने नेहरू से कहा था कि तथ्य बता रहे हैं कि आपकी नीतियां काम नहीं कर रही हैं तो नेहरू ने जवाब में कहा था कि हां, मैं आपके बताए तथ्यों से इनकार नहीं कर सकता. पंडित नेहरू ने अपने इस बयान से अपने व्यक्तित्व और इस संसद की ऊंचाई को दर्शाया. 
 
3. मोदी ने कहा कि भारत में 12 धर्मों के तरह-तरह के उत्सव मनाए जाते हैं. यह इस देश की महानता है. दुनियाभर के धर्म यहां हैं और सद्भाव के साथ हैं.
 
4. देश का एक ही धर्म संविधान है. आइडिया ऑफ इंडिया-पौधे में भी परात्मा होता है, वसुधैव कुटुंबकम, नारी तुम नारायणी, नर करनी करे तो नारायण हो जाए. 
 
5. बोनस एक्ट की सीमा 3500 से बढ़ाकर 7 हजार किया जाएगा. एलिजिबिलिटी 10 हजार से बढ़ाकर 21 हजार रुपए की जाएगी.
 
6. पहले कोई नियम नहीं था कि कोई कितने घंटे काम करेगा. बाबा साहब ने तय किया कि 8 घंटे काम होगा. 
 
7. एक भ्रम फैलाया जा रहा है. मैं मानता हूं कि कोई संविधान नहीं बदल सकता है. अगर कोई ऐसा करता है तो वह आत्महत्या होगी. समाज का पिछड़ा तबका आरक्षण के सहारे आगे बढ़ेगा तो देश मजबूत होगा.
 
8. मोदी ने गांधी जी के एक बयान को याद करते हुए उन्हें कोट किया, ‘पूंजीपति, जमींदार और किसान अपने हित की बात करते हैं. अगर सभी अपने अधिकारों की बातें करें और कर्तव्यों से मुंह मोड़ लें तो अराजकता का माहौल बन जाएगा. अगर सभी अपने कर्तव्यों का पालन करें तो कानून का राज कायम हो जाएगा. राजाओं को राज करने का कोई दैवीय अधिकार नहीं है. किसानों और मजदूरों को अपने आकाओं का हुक्म मानने की जरूरत नहीं है.’
 
9. राजनेता ही खुद पर बंदिशें लगाते हैं. चुनाव में खर्च की सीमा जैसी तमाम चीजों के लिए नेता आगे आए. राजनेताओं को यह सोचना होगा कि लोग हमारे में बारे में राय बदलें.
 
10. नरसिंह मेहता, महात्मा गांधी, ज्योतिबा फुले और आंबेडकर जैसे लोगों ने समाज को बेहतर बनाने का काम किया. जयप्रकाश नारायण ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई.
 
11. हमारा समाज हजारों साल पुराना है. हमारे यहां भी बुराइयां आई हैं लेकिन उसी समाज से निकले महापुरुषों ने बड़े काम किए. पीएम ने ईश्वर चंद विद्यासागर, राजा राममोहनरॉय को याद किया. 
 
12. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार एक वोट से गिर गई थी. यह इस बात का उदाहरण है कि संविधान की ताकत क्या होती है और जब वह सही हाथों में होता है तो क्या होता है.
 
13. लोकतंत्र में असली ताकत तब आती है जब सहमति बनती है लेकिन जब सब फेल हो जाए तो अल्पमत और बहुमत की बात आती है. 
 
15. भारत में सिर्फ संविधान ही सर्वोच्च है. यही विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को उनकी शक्तियां देता है. इस बात को बार-बार उजागर किया जाना चाहिए.
 
16. सरकार का काम सिर्फ संस्थाएं बनाना ही नहीं, उनकी सीमाएं भी तय करना है.
 
17. बाबा साहब आंबेडकर ने यातनाएं सहीं, शोषण सहा. उनका दर्द संविधान में शब्द के रूप में उभरा. उन्होंने बहुत कुछ झेला लेकिन संविधान बनाते समय देश के लिए सबसे अच्छी बातें शामिल कीं. उन्होंने जहर पी लिया.
 
18. संविधान के 60 साल पूरे होने पर हाथी पर उसकी सवारी गुजरात में निकलवाई थी. मैं खुद उसके आगे-आगे चला था.
 
19. सरल भाषा में कहूं तो हमारे संविधान का मूल भाव डिग्निटी फॉर इंडियन और यूनिटी फॉर इंडियन है. कई लोगों का नाम इतना बड़ा है कि कोई उनका नाम ले या नहीं, उनका नाम मिट नहीं सकता.
 
20. संविधान में भी सभी की भूमिका रही है. इस संविधान की जितनी सराहना करें, कम है.
 
21. लाल किले पर से बोल चुका हूं कि इस देश में सभी सरकारों ने काम किया है. किसी ने उम्मीद से थोड़ा कम किया होगा. इस देश को राजाओं ने नहीं बनाया है. इसे गरीबों, शिक्षकों, मजदूरों और किसानों ने बनाया है.
 
22. यह बात सही है कि हम 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाते हैं लेकिन 26 नवंबर भी ऐतिहासिक दिन है.  इस बात को भी उजागर करना अहम है. 26 जनवरी की ताकत 26 नवंबर में निहित है.
 
23. मैं भी अन्य सदस्यों की तरह एक सदस्य के तौर पर अपने भाव पुष्प अर्पित करने के लिए खड़ा हुआ हूं.
 
24.  ”हम आरक्षण पर संविधान में कभी संशोधन नहीं करेंगे.  संविधान में कोई बदलाव नहीं होगा, यह आत्महत्या जैसा हो सकता है.
 
25. मेरा कुछ नहीं, तो मुझे क्या. यह भाव देश के लिए अच्छा नहीं.. देश के लिए कर्तव्यभाव जगाना होगा. देश में सिर्फ अधिकारों पर बात होती है, अब कर्त्व्य पर ध्यान देना होगा.”