ओसामा बिन लादेन के जेहाद में नौकरी के लिए आवेदन फार्म हाल के वर्षों में प्रकट होने वाला सबसे असाधारण दस्तावेज है. यह आवेदन फार्म अमेरिकियों के हाथों में उस समय पड़ा जब उन्होंने अपनी हिट लिस्ट के इतिहास में सबसे वांछित आदमी को पाकिस्तान के एबटाबाद स्थित उसके निवास स्थान में मार गिराया था. इस फार्म के दो पृष्ठों में केवल प्रश्न थे और मेरी पहली प्रतिक्रिया उसे एक मजाक के रूप में खारिज कर देनी की थी. उदाहण के लिए, एक प्रश्न में पूछा गया था, ‘क्या आप आत्मघाती हमला निष्पादित करने के इच्छुक हैं?’ हालांकि, धीरे-धीरे, मनोवैज्ञानिक प्रमाण एक ढांचे में बैठता चला गया. पिता का नाम, दादा का नाम, लेकिन मां का नाम नहीं क्योंकि उनकी योजनाओं में महिलाओं को लुप्त होती पहचान के रूप में देखा जाता है. आगमन की तारीख विशिष्ट थी, और ‘जेहाद थिएटर’ से प्रस्थान, खुदा की मर्जी पर छोड़ दिया गया था. कभी-कभी ‘कृपया’ शब्द का उपयोग भी किया गया था, लेकिन इस शब्द का उपयोग भी भय की भावना के बिना नहीं था.

पंथ कहता है कि जेहाद की घोषणा केवल राज्य द्वारा की जा सकती है. ओसामाओं और खलीफा इब्राहिमों को अहसास है कि लोकप्रिय आकलन में भी उनकी औचित्यपूर्णता जितनी मनोरथ द्वारा आंकी जाएगी उतनी ही प्रपत्र द्वारा भी आंकी जाएगी. वे जितनी शीघ्रता के साथ प्रबंध कर सकते हैं, उतनी शीघ्रता के साथ औपचारिक शक्ति का श्रृंगार प्राप्त करने का प्रयास करते हैं. नए रंगरूटों के लिए सबसे बड़ा प्रलोभन है थोड़े से भूगोल का नियंत्रण और सरकार का एक मान्यता प्राप्त आधार. इस अंदाजे से 1990 के दशक के मध्य में तालिबान की पूरे अफगानिस्तान पर विजय सबसे सफलतम जेहाद था. तालिबान अपनी उन्नति की रक्षा नहीं कर सका क्योंकि उसे पता नहीं था कि शासन किस प्रकार किया जाता है और उसके पास विदेश नीति जैसी अनिवार्य आवश्यकता की बिल्कुल भी कोई अवधारणा नहीं थी. तालिबान ने बाहरी दुनिया के साथ अपने अधिकांश व्यवसाय का जिम्मा अपने मार्गदर्शक, पाकिस्तान को सौंप दिया था और खुद को इस विचार के साथ आश्वासन देता रहा कि सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात से मान्यता मिलना सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त है. अगर न्यूयार्क के ट्विन टॉवर समानांतर जेहाद द्वारा गिराए नहीं जाते तो शायद तालिबान अपने शानदार तख्तापलट में सफल रहता क्योंकि इस का सबूत मौजूद है कि अमेरिका ने काबुल में कट्टरपंथी शासन के साथ गोपनीय तरीके से सुलह-निपटारा शुरू कर दिया था, लेकिन इतिहास में ‘अगर’ और ‘मगर’ के लिए कोई स्थान नहीं है.

अब इराक के बड़े हिस्से पर आईएसआईएस की चढ़ाई दूसरा सबसे सफलतम जेहाद है. यह अब ब्रिटेन के आकार से बड़े क्षेत्र को नियंत्रित करता है. विश्व ने उस समय बहुत बड़ी और महंगी गलती की जब उस ने आईएसआईएस द्वारा अपने लिए अपनाई गई शब्दावली को स्वीकार किया(इस्लामिक स्टेट). यह स्टेट अर्थात राज्य सीरिया का था या लेवांत का, अप्रासंगिक है जो महत्वपूर्ण था वो ये कि यह एक राज्य था. आईएसआईएस ने सोवियत संघ के खिलाफ जेहाद की तुलना में विश्व भर से मुस्लिम जगत के अधिक रंगरूटों को आकर्षित किया है. इसके अस्तित्व का प्रत्येक दिन इसकी बढ़ती हुई सफलता का सबूत है. एक बहुराष्ट्रीय गठबंधन से पस्त होना तो दूर की बात, उसने अब रामादी पर कब्जा कर लिया है जो बगदाद से ज्यादा दूर नहीं है. आईएसआईएस क्षेत्र के सबसे कीमती संसाधनों, पानी व तेल, पर नियंत्रण जमाए बैठा है और उसे खुद पर हवाई-युद्ध में यकीन करने वाले प्रतिद्वंद्वियों को रोक कर रखने का भरोसा है. अगर आईएसआईएस एक स्थापित तथ्य बन जाता है तो यह न केवल पश्चिम एशिया का नक्शा बदल देगा बल्कि एशिया और उत्तरी अफ्रीका की भू-राजनीति भी बदल देगा. उस पर पाकिस्तान लंबे समय से जेहाद का गढ़ रहा है और प्रशिक्षण शिविरों के साथ युद्ध के मैदान का अनुभव भी प्रदान करता रहा है. पाकिस्तान का सैन्य प्रतिष्ठान, प्रवाहों, प्रतिकूल प्रवाहों और अंतर्प्रवाहों को नियंत्रित करता है अथवा नियंत्रित करने का श्रेष्ठ प्रयास करता है. वह जेहाद के लिए महत्त्वपूर्ण भू-खंड है. हालांकि ओसामा बिन लादेन मर चुका है, लेकिन उसका अवैध जेहाद, उसके उत्कर्ष में परिकल्पित क्षितिज से भी आगे तक फैल चुका है. कई सरकारों का मानना है कि वह अल्पकालिक सामरिक हितों के लिए आभासी योद्धाओं का उपयोग कर सकते हैं. विश्वयुद्ध चल रहा है  और केवल एक पक्ष ही किसी प्रकार की वास्तविक लड़ाई लड़ रहा है.

(यह लेखक के निजी विचार हैं.)