तमिलनाडु की सत्ता से जयललिता भले ही कुछ समय के लिए कार्यालय से बाहर रही हों, लेकिन उनकी अपनी पार्टी, अन्नाद्रमुक के वर्करों और उनके अपने राज्य तमिलनाडु के अंदर व बाहर, लोगों में उनकी शक्ति और स्वीकार्यता को कोई क्षति नहीं पहुंची है. उनके अनुयायी और प्रशंसक उनके निर्णायक आचरण, करिश्माई आकर्षण और एक उत्तरदायी सरकार प्रदान करने के लिए उन पर अब भी भरोसा करते हैं. जयललिता के नेतृत्व क्षमता को इसी से आंका जा सकता है कि उच्च न्यायालय के फैसले के शीघ्र बाद ही प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें बधाई देने के लिए फोन किया जो महज एक आकस्मिक शिष्टाचार नहीं था. एक राजनेता द्वारा भ्रष्टाचार प्रेरित आरोपों से जुड़ी कानूनी लड़ाई जीतने के बाद प्रधानमंत्री द्वारा फोन करके बधाई देना बहुत कम देखने को मिलता है, लेकिन मोदी राज्य एवं राष्ट्र की राजनीति में जयललिता के महत्व को जानते हैं. संसद के दोनों सदनों में 48 सांसदों को नियंत्रित करने वाली जयललिता कई वैधानिक अभियानों के अस्तित्व की संभावनाओं को बना या बिगाड़ सकती हैं. सभी संकेतों द्वारा 2016 में होने वाले विधानसभा चुनावों में वह एक धमाकेदार वापसी करेंगी. मतदान सर्वेक्षक उनकी जीत पर दांव लगा रहे हैं क्योंकि बुनियादी स्तर से मिली जानकारी उनकी नीतियों का जोरदार समर्थन दर्शाती है. अधिकांश लोगों का यह मानना है कि जयललिता ने 2011 राज्य चुनावों के दौरान किए गए 170 वादों में से लगभग सभी पूरे किए हैं. 

अम्मा की अपरिहार्यता केवल उनके द्वारा नियंत्रित आंकड़ों में ही नहीं, लेकिन उनके शासकीय तंत्र में भी निहित है, जो गुजरात में मोदी के पहले के शासन तंत्र के समान है और जिसे अब देश भर में लागू किया जा रहा है. जयललिता किसी भी संस्थागत विचारधारा अथवा हठधर्मिता से नहीं जुड़ी हैं. उनकी प्रशासकीय दिशा व नीतियों की प्रकृति स्पष्ट रूप से संकेत करती है कि उन्होंने सही मायने में ऐसे कलयाणकारी राज्य के सिद्धांत का अनुपालन किया है, जिसमें गरीबों व अधिकारहीनों को प्राथमिकता मिले. सक्रिय राजनीति में 33 वर्ष बाद वह अपने राज्य की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जटिलताओं से भली-भांति अवगत हैं. जयललिता ने अपनी प्रशासकीय पारी की शुरुआत 1960 में के कामराज द्वारा शुरू की गई मिड-डे मील योजना के प्रभारी के रूप में की थी जिसका तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमजी राजाचंद्रन द्वारा 1982 में तेजी से विस्तार किया गया था. उन्होंने इस योजना को एक बड़ी सफलता बनाया जो भारत में शुरू की गई अपनी तरह की पहली योजना थी. तब से वह हमेशा योजनाओं और परियोजनाओं को अधिक धन आवंटित करने के पक्ष में रही हैं, जिससे गरीब से गरीब व्यक्ति को लाभ पहुंचे. उदाहरण के लिए बीते चार वर्षों के दौरान उन्होंने ऐसी योजनाओं को शुरू करने में विशेष रुचि ली है, जो अत्यधिक रियायती कीमतों पर आवश्यक वस्तुएं प्रदान करते हैं ताकि निम्न वर्ग को मुद्रास्फीति के दबाव का कष्ट न भुगतना पड़े. अम्मा कैंटीन जैसे उद्यम, 1 से 5 रुपए की कीमत पर 10 लाख व्यक्तियों को इडली, सांभर और चावल का नाश्ता प्रदान करते हैं. इसके बाद, अम्मा मिनरल वॉटर प्रोजेक्ट शुरू किया गया जो स्वच्छ पीने योग्य पानी उपलब्ध कराता है. एक मुख्यमंत्री के रूप में जयललिता ने यह भी सुनिश्चित किया कि मध्य और निम्न मध्य वर्ग को बाजारू कीमतों से कम कीमत पर सीमेंट उपलब्ध हो. जो लोग राज्य-स्वीकृत घरों का निर्माण करा रहे थे, उन्हें सीमित संख्या में 190 रुपए प्रति सीमेंट की बोरी की कीमत से सीमेंट उपलब्ध कराया गया. उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि तमिलनाडु के लोगों को पानी और भोजन के अलावा जायज कीमतों पर दवा भी मिल सकें. उन्होंने राज्य में अम्मा औषधालय खोले जो अत्याधिक रियायती कीमतों पर दवाएं बेचते हैं. 

इसके अलावा जयाललिता ने बेरोजगार डिग्रीधारकों को डिग्री प्रदान कर राज्य सरकार में बड़ी संख्या में रिक्त पदों को भरा. उदाहरण के लिए स्कूलों में शिक्षण अंतर को कम करने के लिए 70 हजार से अधिक शिक्षकों को भर्ती किया गया. शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र रहा हो जिस पर उनकी सरकार की ओर से पर्याप्त ध्यान न दिया गया हो या आर्थिक सहायता न प्रदान की गई हो. उनकी नौकरशाही बड़े व्यापार के लिए अनुकूल निवेश का माहौल बनाने में आश्चर्यजनक रूप से सफल रही है. अब जया की वर्ष 2023 की परिकल्पना तमिलनाडु में 250 करोड़ डॉलर के निवेश की उम्मीद करती है. निसान, हुंडई और बीएमडब्ल्यू जैसी प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों द्वारा वहां विनिर्माण इकाईयां स्थापित करने के साथ राज्य राष्ट्रीय ऑटोमोबाइल उत्पादन के 25 फीसदी का हिसाब देता है. राज्य में डेल, सैमसंग व फॉक्सकॉन जैसी शीर्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा संचालन करने के साथ, तमिलनाडु भारत में बिजली के सामान के उत्पादन में भी 18 फीसदी योगदान करता है. यह इस तरह के अनुकूल निवेश माहौल के कारण ही है कि राज्य में वर्ष 2010-11 के दौरान विदेशी प्रत्यक्ष निवेश 1.2 अरब डॉलर से बढ़कर वर्ष 2014 में 2.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया. एक लोकप्रिय महाशक्ति के रूप में जयललिता के पास पर्याप्त राजनीतिक रसूख है. अब वह आर्थिक सुपरस्टार का दर्जा प्राप्त करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं. 8.25 फीसदी सकल घरेलू उत्पाद के योगदान के साथ, तमिलनाडु देश भर में केवल महाराष्ट्र से दूसरे स्थान पर है. जब जयललिता ने मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला था तब यह घाटा 3 हजार करोड़ रुपए था. पिछले वर्ष इसमें 600 करोड़ रुपए का अधिशेष था. 

राजनीतिक एवं विकास मोर्चे पर उनकी विशाल सफलता से प्रोत्साहित अम्मा एक ऐसे राजनीतिक नेता के रूप में उभर कर सामने आई हैं जो यह जानती हैं कि बेहतर अर्थशास्त्र के साथ अच्छी राजनीति का मिश्रण किस प्रकार किया जाता है. मोदी की तरह जयललिता के पास भी महान वक्तृत्व कौशल और अपने समर्थकों की निर्विवाद वफादारी है. सहकारी संघवाद के मोदी के नए मंत्र में, उनकी जैसी शक्तिशाली नेता एक विघ्नकारी और एक अतिभरक, दोनों भूमिकाएं निभा सकती है. घर पर उनकी लोकप्रियता से स्तब्ध राजनीतिक शत्रुओं के साथ जयललिता अब एक ऐसी क्षेत्रीय नेता हैं, जो अपने राज्य की भौगोलिक सीमाओं से परे मान्यता और प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. मोदी ने सही ढंग से हवा के रूख का अध्ययन किया है और बिना समय व्यर्थ गंवाए तुरंत उनके साथ संपर्क स्थापित किया. 

(यह लेखक के निजी विचार हैं.)