इस देश में मुद्दों की रोटी कैसे बनती है उसका ताजा सबूत है, दुर्गा महिषासुर मामला. स्मृति इरानी ने बाकायदा माफी के साथ उस नोटिस का हिस्सा पढा जिसे कन्हैया औऱ उमर जैसे छात्रों ने 10 फरवरी को बांटा-चिपकाया था.

अब कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस को लगता है कि कहीं ऐसा ना हो कि समूचा हिंदू सेंटिमेंट बीजेपी के साथ लग जाए. दोनों दलों ने स्मृति इरानी से माफी मांगने की जिद जोरदार कर दी. भई आप ऐसे कैसे बोल सकती हैं दुर्गा जी के बारे में.

उधर मायावती जी हैं, उन्होंने ब्राम्हणवादी मानसिकता को मनभर कोसा और कहा कि देखो महिषासुर के नाम पर इन लोगों ने दलितों-आदिवासियों का कितना अपमान किया. इनको बलात्कारी दलित-आदिवासी ही दिखते हैं. मुझे लगता है कि हवा पर भी बहस हो तो उसको देश के सामने ये नेता अपनी अपनी तरह से अपने अपने वोट बैंक को समझा देंगे और पटा भी लेंगे.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)