सिरिमवो भंडारानायके, इंदिरा गांधी, बेनजीर भुट्टो या शेख हसीना के विपरीत, 2016 में ताईवान में हुए राष्ट्रपति चुनावों की विजयी प्रत्याशी का जन्म वैभवशाली राजनीतिक परिवार में नहीं हुआ था. इसलिए, साइ-इंग-वेंग एशिया की सर्वप्रथम गैर-राजवंश महिला राष्ट्रपति (या प्रधानमंत्री) होंगी. इसके साथ ही वह चीन गणराज्य के किसी भी देश की प्रथम महिला राज प्रमुख भी हैं. डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) के कुछ सदस्यों को इस कथन के साथ दिक्कत हो सकती है लेकिन सच्चाई यह है कि ताईवान काफी हद तक चीनी गणराज्य का हिस्सा है. वास्तव में खुद चीन की तुलना में ताईवान पर चीनी संस्कृति एवं परंपरा का गहरा प्रभाव है. माओ जेडांग द्वारा शुरू की गई सांस्कृतिक क्रांति और अन्य परिवर्तनों ने चीन के भीतर काफी हद तक मौजूदा परंपराओं को नष्ट कर दिया था. 
 
ताईवान में चुनाव और नई सरकार द्वारा सत्ता ग्रहण करने के बीच 4 माह का अंतराल होता है जो थोड़ा असामान्य जरूर है इसलिए डीपीपी अध्यक्ष वेंग 20 मई 2016 से पहले राष्ट्रपति पद का कार्यभार नहीं संभाल सकेंगी. राष्ट्रपति के तौर पर साइ वेंग के चार वर्षीय कार्यकाल में भरपूर मात्रा में उतार-चढ़ाव होने की प्रबल संभावना है. आर्थिक विकास की गति थम गई है जिसके कारण देश में युवाओं के लिए रोजगार अवसरों में कमी आई है और इसके साथ ही सरकारी एवं निजी कर्मचारियों को औसत से कम वेतन में कार्य करना पड़ रहा है. 
 
ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि ताईवान के लोगों द्वारा न केवल राष्ट्रपति चुनावों में बल्कि देश के विधानमंडल में भी बीजिंग की कृपापात्र केएमटी पार्टी को सत्ता से निष्कासित करने और उसके स्थान पर अपनी डीपीपी पार्टी निर्वाचित करने पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं. हालांकि ऐसी अक्खड़ प्रतिक्रिया की संभावना न के बराबर है. राष्ट्रपति जिनपिंग डीपीपी के प्रथम राज प्रमुख चेन-सुई-बियान द्वारा चीनी नेतृत्व की ओर मित्रता का हाथ बढ़ाने पर बीजिंग की शत्रुतापूर्ण प्रतिक्रिया को अभी तक भूले नहीं होंगे. इस कड़वे अनुभव ने चेन को उनके शेष कार्यकाल में समझौता करने के प्रयासों को रोकने और चीन को हरसंभव अवसर पर उकसाने के लिए विवश कर दिया था. 
 
केएमटी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मा जिंग-जेऊ द्वारा पूर्व अध्यक्ष चेन को भ्रष्टाचार के आरोपों के आधार पर जेल भेजने से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा होगा. केएमटी के पूर्व अध्यक्ष चेन को हाल ही में खराब स्वास्थ्य के आधार पर रिहा किया गया है और घर में नजरबंद कर दिया गया है. डीपीपी के उग्र सुधारवादी अब ताइपे के मेयर के रूप में मा जिंग-जेऊ के कार्यकाल से संबंधित मुद्दों को उठाकर उन्हें उन्हीं की भाषा में जवाब देना चाहते हैं. मा जिंग पर विधानमंडल के सदस्यों की फोन पर हुई पारस्परिक बातचीत को रिकॉर्ड करने का आरोप लगाया गया है. निश्चित रूप से केएमटी और मा जिंग-जेऊ की टीम में कुछ ऐसे सदस्य हैं जो अभियोग और दंड के लायक हैं, लेकिन इनमें ताईवान के मौजूदा राष्ट्रपति की भूमिका होने को लेकर संदेह जताया जा रहा है. उम्मीद करते हैं कि साइ-इंग-वेंग द्वारा राष्ट्रपति कार्यभार संभालने के साथ ही विपक्षी पार्टी के पूर्व राष्ट्रपति को जेल में डालने का प्रचलन समाप्त हो जाएगा. 
 
ताईवान की आवक राष्ट्रपति साइ के लिए घरेलू राजनीति से ज्यादा ताइपे और बीजिंग के बीच मौजूदा संबंधों की स्थिति परेशानी का सबब है. साइ-इंग-वेंग उनके डीपीपी पूर्वाधिकारी चेन-शुई-बियान से सर्वथा भिन्न हैं और चेन की तुलना में साइ को चीन से संबंधित मुद्दों से निपटने का कहीं अधिक अनुभव है. वहीं दूसरी ओर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा जियांग जेमिम के कठोर दृष्टिकोण अपनाने की संभावना बहुत कम है जिन्होंने सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए ताइपे को सरेआम धमकी दी थी. जियांग के इस कृत्य ने बाद में हुए चुनावों में चीन समर्थक केटीएम की पराजय को सुनिश्चित कर दिया. 
 
दुनिया के शेष राष्ट्रों की तरह ताईवान के लोगों को भी ये कतई गवारा नहीं कि कोई दूसरा देश उनके देश को डराए या धमकाए और अगर चीन साई की जीत के बाद आर्थिक एवं अन्य श्रृंखलाओं में कटौती करने का प्रयास करेगा तो यह दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ ताईवान में चीन के प्रति सद्भाव में भी कमी लाएगा. लेकिन राष्ट्रपति शी जिनपिंग को राज्य के उद्यमों पर ‘शाही’ वर्ग की असीम शक्ति को कम करने के प्रयासों में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, और वह यह भी जानते हैं कि ताईवान के कारोबार चीन गणराज्य की समृद्धि के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं. इसलिए, जी जिनपिंग और जियांग के संबंध जियांग और चेन के संबंधों की तरह तनावपूर्ण होने की संभावना लगभग न के बराबर है. 
 
ताइपे में मा यिंग-जेऊ के शासनकाल के 8 वर्ष के दौरान चीन और ताइवान के रिश्ते ऐसे बेमिसाल स्तर पर पहुंच गए हैं जैसा हाल के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया. इसलिए तनाव एवं आपसी तनातनी के बजाय स्थिरता एवं सौहार्द की संभावनाएं अधिक प्रबल हैं. भारत के लिए महत्वपूर्ण है कि साइ-इंग-वेंग ने अक्सर इस देश की दुनिया के सबसी घनी आबादी वाले लोकतंत्र के रूप में उन्मुक्त कंठ से प्रशंसा की है. यह निश्चितता के साथ कहा जा सकता है कि आने वाली 20 मई के बाद भारत और ताइवान का रिश्ता तीव्र गति के साथ आगे बढ़ेगा. नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 में प्रधानमंत्री पद का कार्यभार ग्रहण करने के बाद से पूर्वी एशिया में भारत की छवि एक महान शक्ति के रूप में उभर कर सामने आई है और अब इस क्षेत्र की सभी राजधानियों की नजरें दृढ़ता से दिल्ली पर टिकी हुई हैं. 
    (ये लेखक के निजी विचार हैं.)