नई दिल्ली. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के कामकाज पर चार वरिष्ठ जजों के द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है. इस गंभीर मुद्दे पर जहां एक ओर पीएम नरेंद्र मोदी ने कानून मंत्री के साथ आपातकालीन बैठक बुलाई है. वहीं बीजेपी सांसद और वरिष्ठ वकील सुप्रमण्यम स्वामी समेत कई वरिष्ठ वकीलों और पूर्व जजों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी है. बीजेपी सांसद और वरिष्ठ वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने चार जजों के प्रेस कॉन्फेंस का स्वागत किया है और प्रधानमंत्री मोदी से इस मामले को सुलझाने की अपील की है. वहीं चारों न्‍यायाधीशों के आरोपों के बाद अब चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा दो बजे मीडिया अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के साथ मीडिया से बातचीत करेंगे.

सुब्रमण्यम स्वामी– बीजेपी के वरिष्ठ नेता और वकील ने कहा है कि बेहद गंभीर मामला है. उन्होंने कहा कि चारों जज बहुत ही ईमानदार है और वो याचिकाकर्ता की बाते जिस तरह से सुनते हैं और फैसला लिखते हैं वह काबिले तारीफ है. जजों की वेदना को समझना चाहिए. स्वामी ने पीएम नरेंद्र मोदी से इस मामले में दखल देने की मांग की है.

उज्जवल निकम– वरिष्ठ वकील उज्जवल निकम ने चार जजों के द्वारा चीफ जस्टिस पर आरोपों के बाद कहा कि ये न्यायपालिका के लिए काला दिन है. उन्होंने कहा कि अब हर कोई न्यायपालिका के फैसले को शक की निगाहों से देखेगा. साथ ही अब से हर फैसले पर सवाल उठने शुरू हो जाएंगे.

सलमान खुर्शीद– कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने इस गंभीर मामले में कहा कि चार जजों ने जो कुंठा व्यक्त की है, वो लोकतंत्र के लिए चिंता की बात है. उन्होंने कहा कि इस अस्थायी विवाद पर विद्वान जजों को इस पर बातचीत करनी चाहिए और मुद्दे का हल निकालना चाहिए. सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह ऐसा मुद्दा नहीं है, जिससे कोर्ट को कोई स्थायी नुकसान हो.

पूर्व चीफ जस्टिस पीबी सावंत– भारत के पूर्व CJI पीबी सावंत ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि जजों को मीडिया के सामने अपनी बात रखने का अभूतपूर्व फैसला लेना पड़ा. उन्होंने कहा कि विवाद भारत के चीफ जस्टिस के साथ है या कुछ आंतरिक विवाद भी हो सकता है.

रिटायर्ड जस्टिस सोढी- चारों जजों के खिलाफ महाभियोग अभियान चलना चाहिए. उन्होंने जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रया देते हुए कहा कि मुझे लगता है कि इन चारों को अब वहां बैठने का कोई अधिकार नहीं है. लोकतंत्र खतरे में है तो उसके लिए पुलिस प्रशासन है. यह उनका काम नहीं है. इस मुद्दे से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. यह प्रशासनिक मामले पर उनकी शिकायत है. वे चार लोग हैं जबकि वहां 23 और लोग भी हैं.चारों ने साथ मिलकर यह दिखाने की कोशिश की है कि मुख्यन्यायाधीश कमजोर है. जो कि अपरिपक्व और बचकाना व्यवहार है.

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह निश्चित रूप से एक बहुत ही गंभीर मामला है, जिसके आरोप मुख्य न्यायाधीश पर लगे है. वहीं केटीएस तुलसी का कहना है कि यह काफी चौंकाने वाला मामला है. अधिकांश सीनियर जज सुप्रीम कोर्ट की प्रशासनिक व्यवस्था से नाखुश थे. जब वे बोल रहे थे तब उनके चेहरे पर दर्द देखा जा सकता था.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ चार वरिष्ठ जजों के आरोपों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के साथ बुलाई इमरजेंसी मीटिंग

चीफ जस्टिस के कामकाज पर सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों ने उठाए गंभीर सवाल