नई दिल्ली: राजनीति में एक कहावत कही जाती है कि ‘आप उनसे प्यार कर सकते हैं, उनसे नफरत कर सकते हैं लेकिन आप उन्हें इग्नोर नहीं कर सकते.’ ये कहावत इन दिनों राहुल गांधी पर सटीक बैठती है क्योंकि जिसे बीजेपी अबतक राजनीति का ‘पप्पू’ समझती थी वो अब उनके लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है. ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी गुजरात में कुछ खास कर रहे हैं या बहुत दमदार स्पीच दे रहे हैं, लेकिन इतना जरूर है कि पिछले दस दिनों से बीजेपी जो बेवकूफियां कर रही है उसका पूरा फायदा राहुल गांधी उठा रहे हैं.

इतना तो साफ है कि गुजरात का चुनावी रण नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी है. जिसमें राहुल गांधी ने कई मामलों में बीजेपी के मुकाबले सियासी बढ़त बनाई हुई है. चाहे वो हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी को साथ मिलाना हो या फिर सेक्यूलर छवि प्रस्तुत करना.

‘कहां तो यह तय था चिराग़ां हर एक घर के लिए 
कहां चिराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए’ 
दुष्यंत कुमार

राहुल गांधी मंदिर जा रहे हैं. ये तो नहीं पता कि पीआर मैनेजमेंट के कहने पर या फिर खुद से लेकिन राहुल गांधी पिछले 15 दिनों में 23 बार मंदिर जा चुके हैं. मंदिर-मंदिर जाकर राहुल गांधी ने मास्टर स्ट्रोक खेला और एक तीर से दो निशाने लगा दिए. पहला बिना पोलराइजेशन किए पार्टी की मुस्लिम समर्थक छवि को सॉफ्ट हिंदुत्व वाली छवि के रूप मे बदलने की कोशिश की. वहीं दूसरी तरफ मंदिर मुद्दा छिन जाने से बौखलाई बीजेपी को गलती करने पर मजबूर कर दिया. पीएम मोदी समेत सभी नेताओं ने राहुल गांधी के मंदिर जाने की निंदा की और उनकी भावना और मंशा पर सवाल उठाए. राहुल गांधी के मंदिर जाने के बाद सोशल मीडिया पर असली और नकली हिंदुत्ववादी पार्टी के नाम से मैसेज आने लगे. बीजेपी की मीडिया सेल असली और नकली हिंदुत्व के जाल में फंस गई वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी लगातार लोगों को बीच जाकर बेरोजगारी, अशिक्षा, महंगाई और किसानों के मुद्दे उठाते रहे.

घरों पर नाम थे नामों के साथ ओहदे थे
बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला
बशीर बद्र

मंदिर मुद्दा छिन जाने से बौखाई बीजेपी ने सोमनाथ मंदिर में नॉन हिंदू रजिस्टर में राहुल गांधी का नाम लिखने को मुद्दा बनाकर सियासी दाव चलने की कोशिश की लेकिन ऐन वक्त पर राहुल गांधी ने जनेऊ दिखाकर बीजेपी का पूरा दाव ही उल्टा कर दिया. अब कांग्रेस के पोस्टरों में पंडित राहुल गांधी का नाम दिख रहा है. यानी इस मामले में भी बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी.

हुकूमत से एजाज़ अगर चाहते हो
अंधेरा है लेकिन लिखो रोशनी है
अशरफ़ मालवी

इस बीज बीजेपी फिर से राम मंदिर का मुद्दा ले आई और कांग्रेस को मंदिर-मस्जिद पर घेरने की कोशिश करने लगी लेकिन कांग्रेस ने मामले को तूल नहीं दिया और पीएम को प्रो रिच पॉलिसी पर घेरते रही. चाहे वो नेनो को 32 हजार करोड़ का लोन देना हो या फिर जीएसटी जिसे राहुल ने गब्बर सिंह टैक्स करार दिया. राहुल ने इस मोर्चे पर भी महफिल लूट ली.

सिर्फ बाक़ी रह गया बेलौस रिश्तों का फ़रेब
कुछ मुनाफिक हम हुए, कुछ तुम सियासी हो गए
निश्तर ख़ानकाही

राहुल गांधी से लगातार सियासी मात खा रही बीजेपी को फिर से पीएम मोदी का सहारा मिला और पीएम ने फिर से चायवाले की छवि पेश कर सिंपथी लेने की कोशिश की. इस बीच कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर ने पीएम मोदी को नीच आदमी बोलकर बड़ी गलती कर दी जिसका बीजेपी ने खूब फायदा उठाया लेकिन राहुल गांधी ने जैसे बीजेपी के हर चाल की काट पहले से ही तैयार रखी हो, बिलकुल उसी तर्ज पर मणिशंकर अय्यर को पार्टी से बर्खास्त कर बीजेपी से ये मुद्दा भी छीन लिया.

तबाह कर दिया अहबाब को सियासत ने 
मगर मकान से झंडा नहीं उतरता है 
शकील जमाली

फिलहाल सियासत में ‘नए किरदार आते जा रहे हैं मगर नाटक पुराना चल रहा है’ देखना होगा कि जिस राहुल गांधी को राजनीति का पप्पू समझकर बीजेपी नजरअंदाज करती रही उससे गुजरात में कैसे पार पाएगी.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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