नई दिल्ली: पिछले साल फरवरी में पटियाला हाउस कोर्ट में तत्कालीन जेएनयू छात्रसंघ नेता कन्हैया कुमार पर कथित हमले को लेकर SIT की जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया है. मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम दिल्ली पुलिस और दिल्ली हाई कोर्ट की रिपोर्ट के आलोक में याचिका पर सुनवाई करेंगे. कामिनी जायसवाल ने अपनी याचिका में तीन वकीलों के खिलाफ कोर्ट की अवमानन का नोटिस जारी करने की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि वकील विक्रम सिंह, यशपाल सिंह और ओम प्रकाश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना की. याचिका में ये भी कहा गया है कि ये तीनों ही पटियाला हाउस कोर्ट में हुए हमले का प्रतिनिधितव किया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने एन डी जय प्रकाश की याचिका का निस्तारण कर दिया जिसमें उन्होंने मांग की थी कि कन्हैया कुमार को पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी के दौरान सुरक्षा मुहैया कराई जाए.

क्या है मामला?

दरअसल ये मामला उस वक्त उठा जब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अफजल गुरु की बरसी मनाने के लिए जुटे छात्रों ने कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगाए. इस मामले में पुलिस ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया. मामले ने इतना तूल पकड़ लिया कि ये राष्ट्रीय मुद्दे में तबदील हो गया और मीडिया ट्रायल को ही सच मानकर जनता ने कन्हैया कुमार को दोषी मान लिया. कन्हैया कुमार को जब पेशी के लिए दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ले जाया गया तब कुछ वकीलों ने कन्हैया कुमार पर हमला कर दिया और उनकी पिटाई कर दी. इस दौरान पुलिस भी वकीलों से कन्हैया कुमार को बचा नहीं सकी. इस बात को लेकर पुलिस की खूब किरकिरी भी हुई.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि वो लॉ एंड ऑर्डर को लेकर चिंतित हैं. कन्हैया की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को रोकने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोर्ट रूम को तुरंत खाली कराया जाए. न्याकिक इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने किसी सुनवाई को बीच में रोकने का आदेश दिया.

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