नई दिल्ली: बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले पर कपिल सिब्बल की सुनवाई टालने की अपील पर वादियों में मतभेद नजर आ रहा है एक तरफ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कपिल सिब्बल के बयान का समर्थन कर रहा है वहीं दूसरी तरफ सुन्नी वक्फ बोर्ड इस मामले पर कपिल सिब्बल से सहमत नहीं है और मामले का जल्द से जल्द समाधान चाहता है. सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर फारुखी ने कहा कि ‘ बोर्ड का मानना है कि इस मामले की जल्द से जल्द सुनवाई होनी चाहिए और फैसला आना चाहिए. मुझे नहीं पता कि कपिल सिब्बल ने किसकी तरफ से कोर्ट में पेश हुए लेकिन मैं इतना जानता हूं कि सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से कपिल सिब्बल को इस तरह का कोई सुझाव नहीं दिया गया.’ आगे उन्होंने कहा कि ‘ हो सकता है कि कपिल सिब्बल हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी की तरफ से कोर्ट में पैरवी कर रहे हों, लेकिन सुन्नी वक्फ बोर्ड ने उन्हें मामले की सुनवाई टालने को लेकर कोई दिशानिर्देश नहीं दिया.’

इस मामले के एक और वादी हाजी महमूद ने भी कहा कि हम भी चाहते हैं कि मामले का जल्द से जल्द निपटारा हो. कपिल सिब्बल की दलील पर उन्होंने भी असहमति जताते हुए ये बात कही. उन्होंने कहा कि चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी, दोनो ही इस मामले पर राजनीति कर रही है और हम राजनीति करना नहीं चाहते, बस मामले का समाधान चाहते हैं.

दूसरी तरफ बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी के सदस्य जफरयाब जिलानी ने कहा कि ‘ कपिल सिब्बल साहब ने हमें भरोसे में लेकर ही सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि इस मामले की सुनवाई 2019 तक टाल दी जाए. हम उनके पक्ष का पूरा समर्थन करते हैं’

इसके अलावा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना वली रहमानी ने भी कपिल सिब्बल के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि ‘ सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल साहब के तर्क का हम समर्थन करते हैं क्योंकि हमे लगता है कि बीजेपी राम मंदिर के मुद्दे को 2019 के लोकसभा चुनावों में भुनाना चाहेगी.’ राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले के मुख्य याचिकाकर्ता हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी ने भी कपिल सिब्बल का समर्थन किया है. गौरतलब है कि इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कपिल सिब्बल की मांग को सिरे से खारिज करते हुए अगली सुनवाई के लिए 8 फरवरी 2018 की तारीख मुकर्रर की है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल मंगलवार को सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कोर्ट से मामले की सुनवाई 2019 तक टालने की अपील की. इसपर सुन्नी वक्फ बोर्ड के सदस्य आजी महबूब ने कहा कि उन्होंने कपिल सिब्बल के सामने ऐसी कोई पेशकश नहीं रखी. हाजी महमूद के बयान के बाद जब विवाद बढ़ा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसके लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड की तारीफ कर दी तो सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील शकील अहमद ने कहा कि हाजी महमूद का सुन्नी वक्फ बोर्ड से कोई रिश्ता नहीं है और वो भी इस केस में तमाम वादियों में एक हैं.

शकील अहमद ने ये भी कहा था कि उनके मुवक्किल यानी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने उनसे नहीं कहा है कि उसे कपिल सिब्बल की इस दलील पर आपत्ति है कि सुप्रीम कोर्ट को अयोध्या मामले को 2019 के बाद के लिए टाल देना चाहिए क्योंकि बीजेपी 2019 के चुनाव में इसका राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करेगी. सिब्बल की दलील थी कि ये अयोध्या में राम मंदिर बनाना राजनीतिक मसला है जिसका फायदा बीजेपी उठा सकती है इसलिए इसे अगले आम चुनाव के बाद निपटाया जाए.

अब सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर फारूखी का खुलकर इस मामले में कपिल सिब्बल की दलील के खिलाफ बोलना ये साफ करता है कि वो बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी के संयोजक जफरयाब जिलानी से सहमत नहीं हैं. जिलानी ने सिब्बल का पक्ष लेते हुए कहा था कि गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या मामले में कपिल सिब्बल की दलील को उठाया जिससे साफ है कि बीजेपी इसका राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है इसलिए इसे 2019 के बाद निपटाना चाहिए.

पढ़ें 

अयोध्या मामले में कपिल सिब्बल को लपेटने वाले हाजी महमूद सुन्नी वक्फ बोर्ड के कुछ नहीं, वो भी केस के एक पार्टी हैं 

विनय कटियार का विवादित बयान, दिल्ली जामा मस्जिद को बताया जमुना देवी का मंदिर