नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देने के लिए मदद के लिए  तय की गई 5 लाख रुपये सालाना आय सीमा को खत्म करने का फैसला किया है. दरअसल 2013 में शुरू की गई ‘डॉक्टर आंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटरकास्ट मैरिज’ के तहत यदि कोई गैर दलित किसी दलित लड़की से विवाह करता है तो सरकार उस जोड़े को 2.5 लाख रुपये की मदद प्रदान करती है. लेकिन अभी तक यह मदद सिर्फ तभी दी जाती थी जब दंपति की सालाना आय 5 लाख रुपये से कम हो. वहीं ये उनकी पहली शादी होने के अलावा हिंदू मैरिज एक्ट के तहत पंजीकृत भी होनी चाहिए.

नए निर्देश के अनुसार मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एंपावरमेंट ने कहा है कि इंटराकस्ट मैरिज में सरकारी मदद के लिए 5 लाख रुपये सालाना आय की सीमा को खत्म कर दिया गया है. बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा हर साल डॉक्टर आंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटरकास्ट मैरिज के तहत कम से कम 500 अंतरजातीय जोड़ों को विवाह के लिए मदद देना तय किया गया था.

नए निर्देश में मंत्रालय ने ऐसे जोड़ों के लिए अपना आधार नंबर उपलब्ध कराना और आधार को बैंक खातों से जोड़ना भी जरूरी कर दिया है. मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि कई राज्यों में अंतरजातीय विवाह को लेकर ऐसी स्कीम हैं और उनपर कोई आय सीमा नहीं लगाई गई है इसलिए केंद्र सरकार ने भी इस सीमा को हटाने का फैसला लिया है. बता दें कि साल 2015 और 2016 में लगभग 522 जोड़ों ने विवाह के लिए प्रस्ताव भेजे थे लेकिन अब तक केवल 72 जोड़ों को ही मंजूरी दी गई है. इसके अलावा साल 2016-2017 में अब तक 736 ऐसे प्रस्ताव आए हैं जिनमें से मात्र 45 को मंजूरी मिली है. वहीं साल 2017-2018 के लिए 409 प्रस्ताव आए हैं और सिर्फ 72 को मंजूरी मिली है.

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