नई दिल्ली: इमरजेंसी खत्म होने के बाद जब जनता पार्टी की सरकार आई तो उसने इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी सरकार ने जो सभी तरह की ज्यादतियां की थी, उनकी जांच के लिए पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस जे सी शाह की अगुवाई में शाह आयोग बना दिया. शाह कमीशन को 6 महीने में रिपोर्ट देनी थी. इस दौरान इंदिरा पर तमाम तरह के दिलचस्प केस और आरोप लगाए गए. जिनमें से एक रॉ एजेंट और पूर्व आर्मी ऑफिसर रुस्तम नागरवाला की जेल में हत्या के इल्जाम समेत चार चिकन और दो अंडे की चोरी का आरोप भी लगाया गया.

रुस्तम का इंदिरा आवास पर आना जाना था. एक बार उसने इंदिरा की आवाज में बिना किसी डॉक्यूमेंटेशन के स्टेट बैंक अधिकारियों को साठ लाख देने के आदेश दिए, रुस्तम को वो पैसे मिल भी गए. लेकिन पकडा गया और जेल में उसकी मौत के आरोप भी इंदिरा पर लगे. बाद मे सुप्रीम कोर्ट ने माना कि उसकी नेचुरल वजहों से मौत हुई है. इंदिरा के पूर्व मंत्री ललित नारायण मिश्रा की मौत का आरोप भी इंदिरा पर लगा तो इंदिरा ने बयान दिया कि कल को मेरा भी मर्डर करके मुझ पर ही मेरे कत्ल का आरोप लगा देंगे.

सबसे दिलचस्प था त्रिखा कमीशन का केस, इंदिरा पर चार चिकन दो अंडे चोरी का भी आरोप लगाया गया था. मणिपुर की कोर्ट ने इंदिरा के खिलाफ इस मामले में नॉन बेलेवल वारंट जारी कर दिए थे, इंदिरा इस केस की सुनवाई के लिए 2000 किमी दूर उस कोर्ट में गई भीं, लेकिन इस केस का क्या हुआ? इंदिरा को क्या सजा मिली? जानने के लिए देखिए हमारा ये शो विष्णु शर्मा के साथ.

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