नई दिल्लीः देश के लिए शहीद होने वाले जवानों, युद्ध में घायल हुए जवानों व दिव्यांगों हुए जवानों के बच्चों को शिक्षा के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद में कटौती का गई है.जिससे वह अपनी ट्यूशन फीस, हॉस्टल और आने-जाने का खर्चा वहन करते थे. रक्षा मंत्रालय ने पूरे खर्चे को कम करके 10,000 कर दिया है. हालांकि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ये फैसला 7वें वेतन आयोग से आया है और इसे कैबिनेट ने पास किया है. हम इस पर फिर से विचार करेंगे. सरकार जवानों, शौर्य पुरस्कार विजेताओं और दिव्यांग जवानों की मांगों के विरुद्ध नहीं है. 13 सितम्बर,2017 को रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी हुए पत्र में कहा गया था कि ट्यूशन फीस और हॉस्टल के लिए आर्थिक मदद को 10,000 रुपये से ज्यादा नहीं बढ़ाया जाएगा.

1971 में बांग्लादेश लिवरेशन वार के बाद सरकार ने युद्ध में शहीद, घायल व दिव्यांग जवानों के दो बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्चा उठाने का फैसला लिया था. जब तक वह ग्रेजूएशन नहीं कर लेते या उन्हें कोई डिग्री नहीं मिल जाती. 2010 में इस पर उठे सवालों का जवाब देते हुए सरकार ने कहा था कि यह योजना बिना किसी बदलाव के चलती रहेगी. बता दें कि इस योजना से करीब 3,200 बच्चों को लाभ मिलता है. इस योजना के तहत वर्ष 2014-15 में केवल 13.6 करोड़ का खर्चा आया था वहीं 2016-17 में 15.93 करोड़ था.

रक्षा मंत्रालय ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें मानते हुए खर्चे में कटौती की है. हालांकि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है. उन्होंने कहा कि सरकार जवानों की मांगों के खिलाफ नहीं है. यह कटौती सातवें वेतन आयोग का फैसला जिसे कैबिनेट ने पास किया है.

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