नई दिल्ली. बिहार चुनावों में महागठबंधन को मिली भारी जीत की गूंज संसद के शीतकालीन सत्र में सुनाई दे सकती है.  जेडीयू की ओर से ऐसे संकेत दिए जा रहे हैं कि जिस जीएसटी विधेयक को इसने शुरूआत में समर्थन दिया था, अब यह उस मुद्दे पर व्यापक विपक्षी एकता के साथ खड़ा हो सकता है.
 
केंद्र की दलील है कि वस्तु एवं सेवा कर को लाने से बिहार जैसे उपभोक्ता राज्यों को लाभ मिलेगा. बिहार में एनडीए की करारी हार के बाद विपक्षी दलों के उत्साह के बीच, जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि वे अन्य दलों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद ही इस बारे में अंतिम फैसला करेंगे.
 
जेडीयू के एक सांसद ने कहा, ‘‘अब परिस्थितियां नई हैं. हम अन्य विपक्षी दलों के साथ विचार विमर्श करने के बाद फैसला लेंगे.’’ महागठबंधन की घटक कांग्रेस ने इस विधेयक के कुछ प्रावधानों का विरोध किया है और इसने संसद के मानसून सत्र में बीजेपी के कुछ शीर्ष नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोपों समेत कई मुद्दे उठाकर इस विधेयक के पारित होने के रास्ते में अवरोध पैदा कर दिया था.
 
राज्यों को किस चीज पर है विवाद
  1. जीएसटी को लेकर राज्यों सरकारों की चिंता है कि टैक्स स्लैब क्या होगा और नुकसान हुआ तो उसकी भरपाई कौन करेगा.
  2. जीएसटी का सिस्टम पूरी तरह तैयार नहीं है. इसके अलावा राज्य और केंद्र के बीच टैक्स बंटवारे को लेकर भी सवाल है.
  3. टैक्स बढ़ाने या घटाने का फैसला कौन करेगा इसपर भी राज्यों को चिंता है. राज्यों को मिली मनर्मजी से टैक्स वसूलने की छूट खत्म हो जाएगी.
  4. राज्यों की मांग है कि सरकार इस मुद्दे का कोई हल निकाले, या फिर उन्हें भारी-भरकम मुआवजा दे. वैसे मुआवजा न मिलने की स्थिति में राज्य सरकारों की मांग है कि पेट्रोलियम और एंट्री टैक्स को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाए.