जयपुर. वसुंधरा राजे सरकार ने आदेश दिया है कि स्कूल की किताबों से उर्दू कविताओं और कहानियों को हटा दिया जाए. सरकार ने सफ़दर हाशमी और इस्मत चुगतई की उन कहानी और कविताओं को हटाने के आदेश दिए हैं जो उर्दू में हैं या फिर जिनमें मुस्लिम पात्र मुख्य रूप से मौजूद हैं. हालांकि सरकार के फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है. 
 
सरकार ने पांचवी क्लास की किताबों में से ‘एक दिन की बादशाहत’,  ‘अजमेर की सैर’ और चौथी क्लास की किताबों से ‘हलीम चला चांद पर’ और ‘सूत का रेशम’ कहानी हटाने के आदेश दिए हैं. इसके आलावा तीसरी क्लास की किताबों से ‘चांद की खातिर’ कहानी हटा दी गयी है. यह फैसला सरकार द्वारा गठित एक समिति ने लिया है. यह समिति पहले ही कक्षा 1 से 8 तक का पाठ्यक्रम बदल चुकी है. 
 
समिति के सदस्यों का कहना है कि इन कहानी और कविताओं में उर्दू के शब्द ज्यादा थे जिससे बच्चों को समझने में दिक्कत आती थी. साथ ही इनमें समुदाय विशेष के रीति-रिवाजों का ज़िक्र था जो गाइडलाइंस के अनुरूप नहीं है. समिति ने सुझाव दिया है कि इन चैप्टर्स की जगह सिन्धी समुदाय के महापुरुषों जैसे ताऊराम और कंवर राम या फिर स्वतंत्रता सेनानी हेमू कालानी की जीवनी को शामिल कर लिया जाए.