गांधीनगर. गुजरात के पाटन के गांव हाजीपुर में आज भी जाति व्यवस्था और छुआछूत एक आम बात की तरह है. असल में कुल 2000 लोगों की आबादी वाले इस गांव में दलित बच्चों के लिए अलग से आंगनवाड़ी बनाई गई है. गांव में आंगनवाड़ी नंबर-159 दलित बच्चों के लिए है जबकि आंगनवाड़ी नंबर-160 सवर्ण बच्चों के लिए इस्तेमाल की जाती है. 
 
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 1997 में आंगनवाडी नंबर-157 की शुरुआत हाजीपुर में की गयी. लेकिन तीन साल बाद ही गांव के सवर्णों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया. असल में हाजीपुर की आबादी में करीब 70 फीसदी सवर्ण (मुख्यतः पाटन और पटेल) जनसंख्या है और उन्हें ही अपने बच्चों को दलित बच्चों के साथ आंगनवाड़ी में जाने से ऐतराज था. इसके बाद आंगनवाडी नंबर-160 की शुरुआत की गयी. दोनों आंगनवाड़ी एक ही स्कूल में संचालित की जाती हैं लेकिन एक दीवार बनाकर दोनों को अलग कर दिया गया है. 
 
आंगनवाड़ी चलाने वालीं वर्षाबेन रावेल बताती हैं कि गांव के सवर्ण लोग अपने बच्चों को दलित बच्चों के साथ खेलते या पढ़ते नहीं देखना चाहते हैं इसी के चलते अलग आंगनवाड़ी बनानी पड़ी हैं. आपको बता दें कि स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ चाइल्ड राइट्स (SCPCR) की एक टीम ने मधुबेन सेनामा के नेतृत्व में 11 जुलाई 2014 को हाजीपुर का दौरा कर इस पूरे मुद्दे पर एक रिपोर्ट कमीशन और सरकार को सौंपी थी लेकिन इसपर अभी तक कुछ नहीं हो पाया है. 
 
फोटो क्रेडिट: इंडियन एक्सप्रेस