लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रेप से पैदा हुए बच्चे के हक में आदेश जारी करते हुए कहा है कि बच्चे का जैविक पिता(रेपिस्ट) की संपत्ति पर पूरा हक होगा. एक मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे बच्चे को कोई गोद ले लेता है तो फिर उसका जैविक पिता की संपत्ति में अधिकार खत्म हो जाएगा वरना वह जैविक पिता (रेपिस्ट) की नाजायज संतान के तौर पर ही देखी जाएगी.
 
क्या है केस?
पीठ के सामने एक लड़की से जुड़ा मामला आया था. इसमें पीडि़त लड़की एक गरीब परिवार से है. इस साल के शुरुआत में उससे रेप किया गया, जिससे वह गर्भवती हो गई और उसके परिवार को काफी समय बाद बेटी के गर्भवती होने का पता चला. तब कानूनी तौर पर गर्भपात कराने की समय सीमा (21 सप्‍ताह) खत्म हो चुकी थी. ऐसे में परिवार ने गर्भपात कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
 
हाईकोर्ट द्वारा बनाए गए डॉक्टरों के पैनल ने इस स्थिति में गर्भपात कराने की सलाह नहीं दी. उन्होंने कहा कि इससे पीडि़ता की जान को खतरा है. इस पर पीडि़ता ने कहा था कि उसकी बेटी इस ‘शर्म’ के साथ समाज में जीवीत नहीं रह सकती है इसलिए बेहतर होगा कि वह बच्ची को जन्म दे और उसे कोई गोद ले ले.