रांची. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) ने केंद्र सरकार और देश के नागरिकों से देश में गैर भारतीय संप्रदायों की बढती जनसंख्या को लेकर चिंतिति होने की अपील की है. RSS के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल ने असम और बिहार जैसे कुछ राज्यों का जिक्र करते हुए जनसंख्या वृद्धि दर में असंतुलन पर एक प्रस्ताव पारित किया है. प्रस्ताव में इस बात पर चिंता जताई गई है कि इन राज्यों के कुछ जिलों में हिंदुओं से ज्यादा मुसलमान हो गए हैं.
 
केंद्र फिर से बनाए पापुलेशन पॉलिसी
RSS ने प्रस्ताव में कहा है कि हमें यह अभी सोचना होगा कि अगले 30-40 सालों में भारत कितने लोगों का भार सह सकता है. हमारी पॉपुलेशन पॉलिसी कैसी हो, हम इसे कैसे लागू करें. घुसपैठियों के कारण बढ़ रहे सांस्कृतिक परिवर्तनों से समाज को कैसे बचाया जाए. 
बैठक के दूसरे दिन सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल ने बताया कि संघ ने केंद्र सरकार से अपील की है कि देश में मौजूद रिर्सोसेज, भविष्य की जरूरतों और जनसंख्या के असंतुलन को ध्यान में रखते हुए देश की पापुलेशन पॉलिसी को फिर से तय कर उसे सभी पर लागू किया जाए. सीमा पार से हो रही घुसपैठ को रोका जाए. नेशनल सिटीजन रजिस्टर बने. घुसपैठियों को नागरिक अधिकारों से तथा उनके जमीन खरीदने के हक से दूर रखा जाए. संघ ने इस समस्या से निपटने के लिए सभी स्वयंसेवकों और नागरिकों से कहा है कि वे जनसंख्या में असंतुलन उत्पन्न कर रहे सभी कारणों की पहचान करें.
 
हजारिका आयोग की रिपोर्ट पर हो विचार
संघ ने कहा, सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई हजारिका आयोग की रिपोर्ट पर विचार हो. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कई चौंकानेवाली जानकारियां दी हैं. असम, बंगाल और बिहार के सीमावर्ती जिलों में मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा है.कई जिलों में जहां हिंदू ज्यादा थे अब अब मुसलमान ज्यादा हो गए हैं. घुसपैठिए राज्य के नागरिकों के अधिकार हड़प रहे हैं.
 
देश हित में बने नीति, जो सब पर हो लागू
डॉ. कृष्णगोपाल ने कहा कि अब यह सरकार को सोचना है कि वह फैमिली प्लानिंग पॉलिसी को लागू करेगी या नहीं. हमारी सोच यह है कि देश हित में एक पापुलेशन पॉलिसी बने, जो सभी पर लागू हो। इस नीति के लागू करने में हमें यह नहीं देखना होगा कि कौन धर्म-संप्रदाय इस बारे में अपनी क्या राय रखता है। हमारे संप्रदाय में ऐसा है, यह कहना नहीं चलेगा. राष्ट्रहित क्या है, यह प्रमुख है.
 
घट रहे भारतीय पंथ-संप्रदायों के माननेवाले
हजारिका आयोग की रिपोर्ट बताती है कि भारतीय पंथ-संप्रदायों को माननेवालों की संख्या लगातार तेजी से घट रही है. वर्ष 1951 और 2011 के बीच भारतीय पंथ और संप्रदाय के लोग 88 प्रतिशत से घट कर 83 प्रतिशत हो गए हैं. वहीं मुस्लिम जनसंख्या का अनुपात 9.8 प्रतिशत से बढ़कर 14.23 प्रतिशत हो गया. इस असंतुलन को ठीक करना होगा. सीमावर्ती इलाकों में मुस्लिम की संख्या शेष भारतीयों की तुलना में 4 गुना अधिक है. मणिपुर में 1951 में भारतीय मूल के लोग 80% थे जो अब घटकर 50% रह गये हैं. अरूणाचल  में 1951 में भारतीय मूल के लोग 99% थे जो अब घटकर 67% रह गये है. आसाम की स्थिति गंभीर है. 
 
1951 में  मुस्लिम जनसंख्या 25% थे जो अब 34.22% हो गये हैं. 1947 में आसाम में एक भी जिला मुस्लिम बहुल नही था लेकिन अब 8 जिले मुस्लिम बहुल हो गये हैं. प. बंगाल के भी सीमावर्ती जिले भी मुस्लिम बहुल हो गये हैं. बिहार का भी किशनगंज जिला भी मुस्लिम बहुल हो गया है. अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उनके नागरिक अधिकार समाप्त किये जायें. संघ ने अपने स्वयंसेवकों और देशवासियों से आह्वान किया है कि वह इसको अपना राष्ट्रीय कर्तव्य मानकर इस संबंध में जनजागरण का काम करे और विधिसम्मत प्रयास करें.