नई दिल्ली. भारत सरकार ने आज बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट दाखिल कर कहा है कि वह देश में चल रहे किराए की कोख (सरोगेसी) को व्यवसायिक बनाए जाने पर रोक लगाएगी. हालांकि सरकार ने कहा है कि सिर्फ़ ज़रूरतमंद भारतीय शादीशुदा निसंतान के लिए इसकी अनुमति दी जाएगी लेकिन इसके लिए कानून से परमीशन लेनी होगी. सरकार सरोगेसी के व्यवसायीकरण के पक्ष में नहीं है. सरोगेसी की व्यवसायिक बनाने वालों को सजा देगी.
 
सरकार के द्वारा लिए गए इस फैसले से भारत में सरोगेसी के कारोबार को बडा झटका लग सकता है. इस वक्त भारत में सरोगेसी का कारोबार 9 अरब डॉलर का है. आलोचकों का कहना है कि इस कानून के न होने के वजह से भारत की ग़रीब और कम उम्र महिलाओं का शोषण किया जाता है. 
 
इसके अलावा कोई विदेशी भारत में सरोगेसी की सेवाएं नहीं ले सकता है और भारतीय दंपत्तियों के लिए ही सरोगेसी की अनुमति होगी. सरकार ने कहा कि इस कानून को बनाने में कुछ समय लगेगा.
 
बता दें कि अब तक भारत में किराए की कोख दिए जाने पर किसी प्रकार की कानूनी रोक नहीं थी. ये मामला सुप्रीम कोर्ट में तब आया जब एक जर्मन दंपत्ति ने सरोगेसी के लिए गुजरात के आनंद में एक महिला को सरोगेसी के लिए लिया. गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चा भारतीय नागरिक है. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की. सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में बच्चे को जर्मनी भेज दिया. अब सुप्रीम कोर्ट को इस मामले के कानूनी पहलू को तय करना है.