वाराणसी. दादरी में बीफ की अफवाह पर एक अल्पसंख्यक की हत्या के बाद ‘काशी का अस्सी’ के मशहूर लेखक काशीनाथ सिंह ने भी साहित्य अकादेमी अवॉर्ड लौटाने का एलान कर दिया है.
 
काशीनाथ सिंह ने कहा कि वे मशहूर कन्‍नड़ लेखक एमएम कुलबर्गी, डॉ. दाभोलकर और गोविंद पंसारे की हत्‍या, दादरी कांड और केंद्रीय मंत्रि‍यों के बयानों से आहत होकर सम्मान लौटा रहे हैं. शहर के सुंदरपुर इलाके के बृज एन्‍क्‍लेव में मौजूद अपने घर पर मीडिया से काशीनाथ सिंह ने यह बात कही. 
 
 
दलीप कौर तिवाना ने पद्मश्री सम्मान लौटाया 
पंजाबी लेखिका दलीप कौर तिवाना ने खराब सांप्रदायिक माहौल पर दुख जताते हुए अपना पद्मश्री सम्मान लौटा दिया है. तिवाना ने अपने बयान में कहा,’गुरुनानक देव और गौतम बुद्ध की इस धरती पर 1984 में सिखों के साथ और हाल में मुसलमानों के साथ बढ़ती सांप्रदायिकता के कारण हो रहे अत्याचार समाज और देश के लिए शर्मनाक हैं. सच और न्याय के लिए खड़े होने वालों की हत्या हमें ईश्वर और दुनिया के सामने शर्मसार कर रहे हैं. इसलिए मैं विरोध में पद्मश्री अवार्ड लौटा रही हूं.’
 
नयनतारा सहगल ने की थी पुरस्कार लौटाने की शुरुआत
दादरी में मोहम्मद अखलाक की हत्या के बाद सबसे पहले साहित्यकार नयनतारा सहगल ने इस तरह की घटनाओं को रोकने में सरकार की नाकामी के खिलाफ साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाया था. नयनतारा सहगल देश के पहले पीएम जवाहरलाल नेहरू की भंगिनी हैं.
 
उनके बाद अशोक वाजपेयी, उदय प्रकाश, के. सच्चिदानंद, मंगलेश डबराल, राजेश जोशी, सारा जोसेफ समेत अब तक 24 साहित्यकारों ने साहित्य अकादमी को पुरस्कार लौटा दिया है.
 
सांप्रदायिक माहौल की वजह से साहित्य अकादमी पुरस्कारों की वापसी के सिलसिले के बीच दिलीप कौर तिवाना पहली साहित्यकार हैं जिन्होंने अब पद्मश्री अवार्ड लौटा दिया है.