नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ से राष्ट्रीय न्यायिक आयोग को खारिज किए जाने के फैसले को संसद की संप्रभुता पर सवाल बताया है.

रविशंकर प्रसाद का कहना है कि न्यायपालिका की आजादी को लेकर हम संकल्पित हैं. हम किसी तरह के टकराव की इच्छा नहीं रखते और इस मुद्दे पर पूरी जानकारी लेने के बाद ही टिप्पणी करेंगे. उन्होंने कहा कि 1994 में कॉलेजियम सिस्टम आया था और इस बीच कई सुझाव आए कि आयोग की स्थापना की जाए.

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 2002 में खुद पूर्व चीफ जस्टिस चिलैया ने आयोग की सिफारिश की थी. संसद की तीन कमेटियों की रिपोर्ट में भी कॉलेजियम सिस्टम को बदलकर न्यायिक आयोग की सिफारिश की गई थी. इस मुद्दे पर पिछले 20 साल से चर्चा चल रही थी.

प्रसाद ने कहा कि इस बिल को बनाने से पहले मैंने देश के 26 राजनीतिक दलों को पत्र लिखा था और सभी ने कॉलेजियम सिस्टम के बजाए न्यायिक आयोग का समर्थन किया. लोकसभा में सबने एकमत से इसे मंजूरी दीय राज्यसभा में भी सिर्फ एक सदस्य को छोड़कर सभी ने इसे पास किया था और जो एक सदस्य विरोध में थे वो पूर्व बीजेपी नेता राम जेठमलानी थे, जिन्होंने वॉकआउट किया था.